पर्यावरण अनुसंधान (आरई)

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जैव संसाधन एवं पर्यावरण (एनएनआरएमएस एससी-बी) पर राष्ट्रीय प्राकृति‍क संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एनएनआरएमएस)

राष्ट्रीय प्राकृति‍क संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एनएनआरएमएस) की स्‍थापना 1983 में योजना आयोग, भारत सरकार के संरक्षण में की गई है एनएनआरएमएस का जनादेश प्राकृति‍क संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण नि‍गरानी एवं आपदा प्रबंधन सहि‍त राष्ट्रीय वि‍कास अनुप्रयोगों के लि‍ए उच्‍च तकनीकी जानकारी जैसे दूरस्‍थ संवेदी (आरएस), भौगोलि‍क सूचना प्रणाली (जीआईएस) और जीपीएस (ग्‍लोबल पोज़ि‍शनिंग सि‍स्‍टम) का पारंपरि‍क तकनीकों / वि‍धि‍यों के संयोजन के साथ उपयोग का प्रचार करना रहा है एनएनआरएमएस के लक्ष्‍यों को साकार करने में भारतीय दूरस्‍थ संवेदी उपग्रहों के डेटा की सतत उपलब्‍धता ने महत्‍वपूर्ण भूमि‍का नि‍भाई है, डीओएस (अंतरि‍क्ष वि‍भाग) एनएनआरएमएस की नोडल एजेंसी है और उसे सभी सचिवालयीन सहायता प्रदान करती है| पीसी-एनएनआरएमएस ( एनएनआरएमएस की योजना समि‍ति‍) द्वारा नीति दिशानिर्देशों के साथ ही साथ सकल प्रगति की निगरानी की जाती है पीसी-एनएनआरएमएस की अध्यक्षता सदस्य विज्ञान, योजना आयोग द्वारा की जाती है और भारत सरकार के उपयोगकर्ता मंत्रालयों के सचिवों, इसके सदस्य के रूप में की जाती है एनएनआरएमएस में विस्तृत निर्देश एवं समन्वयन स्थायी समितियों द्वारा प्रदान किया जाता है महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे, कृषि एवं भूमि (एससी-ए), कृषि एवं भूमि जैव-संसाधन एवं पर्यावरण (एससी-बी), भूविज्ञान एवं खनिज संसाधन (एससी-जी), समुद्री संसाधन (एससी-ओ), दूरस्थ संवेदी तकनीक एवं प्रशिक्षण (एससी-टी) तथा, जल संसाधन (एससी-डबल्यू), ग्रामीण विकास (एससी-आर), शहरी (एससी-यू), मानचित्रकारी (एससी-सी), मौसम विज्ञान (एससी-एम) को कवर करने के लिए 10 उच्च क्षमता वाली स्थायी समितियां हैं इन समितियों की अध्यक्षता भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के सचिवों द्वारा की जाती है. स्थायी समितियां (एससी) महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने, उन्नत विधियों / तकनीकों की पहचान करने, विशिष्ट राष्ट्रीय परियोजनाओं/कार्यक्रमों को तैयार करने और/या स्वीकृत करने के लिए उत्तरदायी होती हैं ये किसी विशिष्ट विनियोग क्षेत्र में विभिन्न विभागों के बीच समन्वयन के लिए भी उत्तरदायी होती हैं

1.एनएनआरएमएस एससी-बी के संबंध में

संविधान : जैव-संसाधन एवं पर्यावरण पर एनएनआरएमएस की स्थायी समिति (एससी-बी) की अध्यक्षता पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव द्वारा की जाती है और इसमें पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, योजना आयोग, कृषि एवं सहयोग विभाग, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आसाम, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और सिक्किम राज्यों के वन विभाग के सदस्य, और उत्तर पूर्वी समिति, भारतीय वन सर्वेक्षण, अंतरिक्ष विभाग तथा एनएनआरएमएस/इसरो के प्रतिनिधि सदस्य सचिव के रूप में होते हैं।

महत्वपूर्ण क्षेत्र : एससी-बी ने देश की प्रमुख पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समस्याओं के समाधान हेतु दूरस्थ संवेदी आधारित अध्ययन करने के लिए अभी तक 56 प्राथमिकी क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें वन, चरनी, पौधे और पशु संबंधी संसाधन, आर्द्र भूमि, भूमि क्षरण, जल एवं वायु प्रदूषण इत्यादि, मानव एवं जीव मंडल कार्यक्रम तथा खनन, तटीय क्षेत्रों, वन्यजीवन आश्रयस्थल इत्यादि जैसे कुछ विशिष्ट क्षेत्र शामिल हैं।

एनएनआरएमएस एससी-बी गतिविधियों की प्रगति
अब तक, एनएनआरएमएस एससी-बी ने 25 बार बैठकें की हैं और मुख्य पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समस्याओं जैसे वन, चरनी, पशु संबंधी संसाधनों, आर्द्र भूमि, वनस्पति एवं प्रवाल संसाधन सहित तटीय क्षेत्रों, भूमि क्षरण, खनन और औद्योगिकीकरण, नदी प्रदूषण इत्यादि के प्रबंधन का समाधान करते हुए 114 दूरस्थ संवेदी विनियोग परियोजनाएं (जिनमें से 77 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं) प्रायोजित की हैं। ये परियोजनाएं अंतरिक्ष विभाग, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, राज्य दूरस्थ संवेदी विनियोग केंद्रों द्वारा परिचालित की गई हैं।

तकनीकी एवं वित्तीय उप-समिति
इस उप-समिति की स्थापना एनएनआरएमएस-एससी-बी के अंतर्गत धन प्रदान करने संबंधी सभी प्रस्तावों की तकनीकी एवं वित्तीय कोणों से जांच/समीक्षा करने के लिए की गई थी। एससी-बी द्वारा वित्तीय सहायता के लिए, केवल उप-समिति द्वारा अनुशंसित प्रस्तावों की ही समीक्षा की जाती है।

शोध के निष्कर्षों की उपयोगकर्ता एजेंसियां
एनएनआरएमएस एससी-बी ने विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से हमारे देश के पर्यावरण/पारिस्थितिकी की निगरानी/प्रबंधन करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । एनएनआरएमएस कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्रालय द्वारा स्वीकृति परियोजनाओं के परिणाम/जानकारी की उपयोगिता के लिए संभावित उपयोगकर्ता एजेंसियां, केंद्र सरकार के विभागों/एजेंसियां, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, राज्य सरकार के विभाग/एजेंसियां तथा स्वयं पर्यावरण एवं वन मंत्रालय होते हैं, जिसमें उसके प्रशासकीय नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संगठन जैसे भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई), भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (झेडएसआई), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई), इत्यादि शामिल होते हैं । अब तक क्रियान्वित की गई कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाएं, जो देश के लिए बहुत उपयोगी रही हैं:-

  • संपूर्ण देश के लिए आर्द्र भूमि (मानचित्रण) की सूची  (यह आर्द्र भूमि पर देश की पहली आकाशीय जानकारी है) ।
  • पश्चिम बंगाल राज्य की आर्द्र भूमि सूचना प्रणाली तटीय भूमि उपयोग मानचित्रण, वनस्पति एवं प्रवाल शैलमाला का मानचित्रण करती है ।
  • राष्ट्रीय वर्गीकरण प्रणाली एवं बंजर-भूमि की स्थिति की निगरानी की प्रविधि का मानकीकरण|
  • तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरझेड) जिसका उपयोग सीआरजेड अधिसूचना क्रियान्वयन में किया जा रहा है ।

निधीकरण का प्रतिमान

    • राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एनएनआरएमएस) का कार्यक्रम पूरी तरह से केंद्रीय रूप से स्वीकृत स्कीम है जिसे योजना आयोग द्वारा स्वीकृति मिली हुई है और इसमें राज्यों या किसी भी अन्य एजेंसी की कोई भी वित्तीय प्रतिभागिता शामिल नहीं है।  हालांकि, शोध संस्थानों को धन केवल किश्तों में ही दिया जाता है ।
    • पर्यावरण अनुसंधान, अगस्त- 2006 की सहायता के लिए दिशा-निर्देश
    • दिशा-निर्देशों का परिशिष्ट *:
    • परियोजना की वार्षिक प्रगति का प्रारूप (अनुलग्नक- VII)
    • अंतिम तकनीकी प्रतिवेदन का प्रारूप (अनुलग्नक-VIII)
    • कार्यकारी सारांश का प्रारूप (अनुलग्नक-IX)
    • अनुसंधान कर्मियों की परिलब्धियों पर संशोधित दिशानिर्देश.
    • परियोजना की वार्षिक प्रगति का प्रारूप (अनुलग्नक VII), अंतिम तकनीकी प्रतिवेदन का प्रारूप (अनुलग्नक-VIII) तथा कार्यकारी सारांश का प्रारूप (अनुलग्नक-IX)
    • जैव-विविधता के लिए डॉ. बी.पी. पाल राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप पुरस्कार हेतु दिशानिर्देश
    • पीताम्बर पंत राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप पुरस्कार हेतु दिशानिर्देश
    • वर्ष 2007 और 2008 के लिए पीताम्बर पंत राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप पुरस्कार एवं जैव-विविधता के लिए डॉ. बी.पी. पाल राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप पुरस्कार

नोट- अनुसंधान अनुदान पर विचार के लिए मंत्रालय को आवेदन करने के इच्छुक सभी स्वत: प्रेरित अनुसंधान प्रस्ताव वर्ष में कभी भी प्रत्येक कार्यक्रम के संबंधित संपर्क व्यक्ति के पास जमा किए जाने चाहिए (कार्यक्रम के संपर्क व्यक्ति का विवरण इन दिशानिर्देशों के अनुलग्नक-I में दिया गया है):

प्रति,
कार्यक्रम—संबंधी व्यक्ति से संपर्क करें-
(अधिकारी का नाम और पदनाम),
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय
सी.जी.ओ. कॉम्प्लेक्स,
लोदी रोड,
नई दिल्ली-110003.