पर्यावरणीय सूचना (ईआई)

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प्रस्तावना

1982-1983 (छठी योजना) के अस्तित्व में आने के समय से ही पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वैज्ञानिक, तकनीकी एवं अर्ध-तकनीकी सूचना प्रदान करके पर्यावरणीय सूचना प्रणाली (एनविस) ने सरकार के सभी स्तरों पर तथा निर्णय लेने के स्तर पर नीति निर्माण एवं पर्यावरण प्रबंधन के हितों को पूरा किया है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा करना तथा सभी जीव-जन्तुओं के जीवन की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसमें सुधार करना है। प्रयोजन नीति निर्माताओं, निर्णयकर्ताओं, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों एवं आम जनता समेत सभी संबंधितों को वेब समर्थित पर्यावरणीय सूचना के संग्रहण, मिलान, भंडारण, पुन: प्राप्ति एवं प्रसार से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों के एकीकरण का सुनिश्चय करना है।

इस स्कीम के दीर्घावधिक उद्देश्य निम्नवत् हैं:

  • पर्यावरणीय विज्ञान और इंजीनियरी में रिपोजिटरी और प्रसार केंद्र बनाना।
  • पर्यावरणीय स्वरूप की सूचना प्राप्ति, प्रोसेसिंग, संग्रहण, पुन: प्राप्ति तथा प्रसार के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना।
  • पर्यावरणीय सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और नवाचार को सहायता एवं प्रोत्साहन देना।
  • इसके अल्पावधिक उद्देश्य इस प्रकार हैं:
  • सूचनाओं के प्रयोत्ताओं, स्रोतों, प्रोसेसर्स और प्रसारकों की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनकी मौजूदा संगत जरूरतों से संबंधित राष्ट्रीय पर्यावरणीय सूचना सेवा उपलब्ध कराना।
  • भंडारण करने, पुन: प्राप्त करने और प्रचार-प्रसार करने की क्षमता का निर्माण करना ताकि सूचना प्रयोत्ताओं तक शीघ्रातिशीघ्र पहुंच सके।
  • पर्यावरण से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संपर्क को बढ़ावा देना।
  • पर्यावरणीय सूचना प्रोसेसिंग और उसे प्रयोग करने की क्षमताओं का संवर्धन करने के लिए डिजाइन किए गए कार्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शिक्षा को बढ़ावा, समर्थन और सहायता देना।
  • विकासशील देशों के बीच पर्यावरण संबंधी सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।

प्रकार्यात्मक दृष्टि से, यह एनविस केंद्रों की एक विकेंद्रीकृत प्रणाली है जिसे विषय विशिष्ट डाटाबेसों को एक वितरित नेटवर्क विकसित करने का कार्य सौंपा गया है। व्यापक श्रेणी के विषयों को शामिल करने के लिए एनविस नेटवर्क को बढ़ावा देने में विभिन्न राज्य सरकारों/ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के सहयोग से पर्यावरण एवं संबंधित मुद्दों की राज्य/संघ राज्य क्षेत्र व्यापी स्थिति पर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के विभागों/ प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से 28 एनविस केंद्र कार्य कर रहे हैं।

इस समय एनविस के नेटवर्क में 68 एनविस केंद्रों की एक श्रृंखला है जिनमें से 40 केंद्र विषय विशिष्ट हैं तथा 28 केंद्र राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर हैं। ये केंद्र पूरे देश में उल्लेखनीय संगठनों/संस्थाओं/राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के विभागों/ विश्वविद्यालयों द्वारा स्थापित किए गए हैं। एनविस का प्रमुख केंद्र मंत्रालय में स्थित है तथा यह एनविस नेटवर्क के सभी साझेदारों के कार्य-कलापों का समन्वय करने में पर्यावरणीय सूचना प्रभाग की सहायता करता है। एनविस नेटवर्क के साझेदारों की सूची यहाँ पर दी गई है।

2013-2014 की उपलब्धियां/प्रगति

2013-14 में एनविस स्कीम के अंतर्गत स्थापित एनविस नेटवर्क ने सूचना पत्रों, एब्सट्रैक्टिंग सेवाओं आदि के माध्यम से सूचना से संबंधित अपनी अधिदेशित वार्षिक गतिविधियों, डाटाबेस का विकास, अपेक्षित सूचना पैकेज का प्रकाशन आदि से संबंधित कार्य जारी रखा। इसने वर्ष के दौरान अपनी प्रश्नोत्तरी सेवा को जारी रखा। इसकी वजह से अन्य बातों के साथ-साथ एक सूचना डाटाबेस का अनुरक्षण एवं नवीनीकरण आवश्यक हो गया है जिसमें वर्णनात्मक सूचना एवं संख्यात्मक डाटा दोनों शामिल हैं। प्रकाशन, रिपोर्ट, पुनर्मुद्रण एवं संबंधित विषयों पर उद्धरण के रूप में वर्णनात्मक सूचना को प्रसार के लिए एकत्रित किया गया। संबंधित विषय पर संख्यात्मक डाटा को संग्रहीत, संकलित और प्रोसेस किया गया तथा उनका इन केंद्रों के माध्यम से प्रसार के प्रयोजनार्थ विश्लेषण किया गया। प्रकाशन एवं रिपोर्ट के रूप में प्रलेखन निकाले गए। इस प्रकार संकलित सभी सूचनाओं को एनविस से संबंधित केंद्रों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया।

एस.एफ.सी. द्वारा दिनांक 25 मार्च 2013 तथा दिनांक 9 मई 2013 को एनविस स्कीम का मूल्यांकन किया गया तथा इसे बारहवीं योजना अवधि में जारी रखने के लिए अनुमोदित किया गया। स्कीम के लिए एस.एफ.सी. द्वारा अनुमोदित संशोधित दिशा-निर्देशों को कार्यान्वित किया गया है। दिनांक 21 जून, 2013 को योजना आयोग ने भी स्कीम की पुनरीक्षा की । दिनांक 24 से 25 जून, 2013 को सचिव (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) की अध्यक्षता में हुई 10 सदस्यों की पुनर्गठित एस.ए.सी की बैठक में 39 विषयगत केन्द्रों की विस्तार से पुनरीक्षा की गई। इंस्टीच्यूट आॅफ फॉरेस्ट जेनेटिक्स एण्ड ट्री इम्प्रूवमेंट, कोयम्बतूर में `फॉरेस्ट जेनेटिक रिसोर्सिस एण्ड ट्री इम्प्रूवमेंट` पर एक नया विषयगत एनविस केन्द्र स्थापित किया गया।

एनविस के प्रमुख केंद्र द्वारा मंत्रालय की वेबसाइट (URL: http://www.moef.gov.in) को अनुरक्षित तथा निरंतर अद्यतन किया गया और वर्ष 2013-14 के दौरान सभी संबंधितों को वेबसाइट के माध्यम से सूचना का प्रसार किया गया। वेबसाइट (चित्र-55) को मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों के साथ जोड़ा भी गया ताकि संबंधित विषयों पर वे अद्यतन सूचना प्राप्त कर सकें। सरकारी वेबसाइटों के विकास एवं प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इसे 2013-14 में एक ओपन सोर्स अंतर्वस्तु प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) में अपग्रेड किया गया तथा दिनांक रियल टाईम वेरीफिकेशन और अपडेशन सक्षम हो गया। वर्ष 2013-14 में मंत्रालय की वेबसाईट पर प्रतिमाह औसतन 2.6 लाख हिट रिकार्ड किए गए।

एनविस नेटवर्क के सभी साझेदारों को जोड़ने वाले एनविस के एक पोर्टल (URL http://www.envis.nic.in) को नियमित आधार पर अपडेट किया जाता है। यह पोर्टल (चित्र-56) केंद्रों के अंदर अंत:क्रिया के लिए तथा इन केंद्रों को सौंपे गए विषयगत एवं राज्य विशिष्ट विषयों की अनेक विस्तृत श्रेणियों पर सूचना के लिए प्रेरक के रूप में काम करता है। इस पोर्टल के होम पेज से सभी एनविस केंद्रों की वेबसाइटों को सीधे अक्सेस भी किया जा सकता है जिससे प्रमुख घटनाओं, गतिविधियों एवं संपूर्ण नेटवर्क के वर्तमान अपडेट पर सूचना का समर्थकारी स्रोत संभव होता है। एक व्यापक तथा डायनमिक एनविस पोर्टल, जिससे ऑन-लाईन मॉनीटरिंग अद्यतन एनविस वेबसाईटस का मूल्यांकन किया जा सकेगा, विकसित किया जा रहा है ।

प्रश्नोत्तर सेवा एनविस नेटवर्क की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक है । एनविस प्रमुख केंद्र तथा इसके साझेदारों ने वर्ष के दौरान भारी संख्या में प्रश्नों का उत्तर दिया तथा यथासंभव सारवान सूचना प्रदान की। इसके अतिरित्त, जहां सूचना आसानी से उपलब्ध नहीं होती है, नेटवर्क ने संबंधित प्रयोत्ताओं को `रेफरल सेवा` भी प्रदान की। गंगटोक, सिक्किम में 28 से 30 मार्च, 2014 तक पांचवी राष्ट्रीय मूल्यांकन कार्यशाला का आयोजन किया गया। मंत्रालय द्वारा गठित दो स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों द्वारा इन केंद्रों का मूल्यांकन किया गया, एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति राज्य सरकारों/ संघ राज्य क्षेत्र केंद्रों द्वारा आयोजित दूसरी समिति विषयगत केंद्रों के लिए थी। प्रतिभागी एनविस केंद्रों ने अपनी 2013-14 की कार्य-कलापों को प्रदर्शित किया और अपने विषय संबंधी डाटा संग्रहण, संकलन, सत्यापन तथा डाटा अद्यतन करने पर प्रकाश डाला विशेषत: नए विकसित डाटाबेस तथा प्रकाशन/सूचना उत्पाद पेश किए। केन्द्रों ने एनविस कार्य-कलापों को पूरा करने के दौरान वर्तमान में सामने आने वाली विभिन्न्न तकनीकी, वित्तीय तथा प्रशासनिक बाधाओं पर भी प्रकाश डाला। समितियों ने एनविस केन्द्रों की कार्यशीलता को बेहतर बनाने तथा समग्र एनविस योजना में सुधार के लिए सिफारिशें कीं।

संबंधित राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति तथा एस.ए.सी द्वारा प्रत्येक केन्द्र के प्रदर्शन के मूल्यांकन, मंत्रालय के एक अधिकारी के वास्तविक दौरे की सिफारिशों तथा एनविस केन्द्र के ऑन-लाईन मूल्यांकन के आधार पर इस प्रभाग ने 64 केन्द्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अलावा 49 केन्द्रों को आई.टी. उपकरणों की अधिप्राप्ति के लिए गैर-आवर्ती अनुदान से सहायता प्रदान की गई ।

वर्ष 2013-14 के दौरान कुछ एनविस केंद्रों के कार्य-कलाप

  • बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस),मुंबई में एनविस केंद्र : `पक्षी संबंधी पारिस्थितिकी एवं अंतर्देशीय नम भूमि` संबंधी इस विषयगत केंद्र द्वारा अपनी वेबसाईट (http://bnhsenvis.nic.in) पर डाले गए डाटाबेस में दुर्लभ पक्षी (टाईम सीरीज डाटा), दुर्लभ पक्षी जिनका व्यापार किया जाता है, सी.आई.टी.ई.एस. में सूचीबद्ध पक्षी आदि शामिल हैं। वेबसाईट को हर दो दिन मे अद्यतन किया जाता है। केन्द्र ने `पक्षी तथा चमगादडों पर पड़ने वाले विंडमिल के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए विद्यमान वैश्विक दिशानिर्देशों, नीतियों तथा तरीकों की पुनरीक्षा : भारत में अपेक्षताएं` विषय पर न्यूजलैटर का एक विशेष संस्करण प्रकाशित किया। एनविस परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए एनविस स्टॉफ ने जिन कार्यशालाओं तथा सम्मेलनों में भाग लिया उनमें जून, 2013 में सीईपीटी यूनीवर्सिटी द्वारा आयोजित `जियोमेटिक्स : स्पेस एण्ड एप्लीकेशन`, सितम्बर 2013 मे बंगलौर मे बीएनएचएस-कन्जर्वेशन एजुकेशन सेंटर एण्ड स्टुडेन्ट्स कॉन्फ्रेंस आदि शामिल हैं।
  • उपभोक्ता शिक्षा तथा अनुसंधान केन्द्र (सी.ई.आर.सी.), अहमदाबाद में एनविस केन्द्र : `ईको लेबलिंग तथा पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का संवर्धन` संबंधी यह विषयगत केन्द्र पूरे विश्व में ईको लेबलिंग स्कीम पर होने वाले नवीनतम विकास संबंधी जानकारी से अपनी वेबसाईट (http://cercenvis.nic.in) को अद्यतन करता रहता है। यह केन्द्र पर्यावरण अनुकूल उत्पादों पर अनुसंधान करता है तथा उनके बारे में जानकारी अपलोड करता है। नवीनतम विकास के साथ यह ईको लेबलिंग, ईको मार्क तथा विभिन्न्न ईको स्कामों के बारे में समाचार, विचार तथा जानकारी प्रदान करता है। यह केन्द्र हरित उत्पाद, सततता तथा संगत जानकारी पर लिखे गए अनुसंधानात्मक लेखों को प्रकाशित करता है। इसने पुस्तकों, रिपोर्टों तथा शोध पत्रों मे छपे लेखों से सार निकाल कर ईको लेबलिंग तथा ईको उत्पादों के बारे में जानकारी संकलित की है। फेसबुक पर भी एक पेज (http://www.facebook.com/EcoProductsEcoLabeling) है जो जानकारी देने के साथ-साथ युवाओं को ईको उत्पादों के प्रति सुग्राही बनाता है।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून में एनविस केंद्र : `वन्यजीव तथा संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन` विषय संबंधी इस विषयगत केंद्र ने दिनांक 30 सितंबर, 2013 को संस्थान के वार्षिक अनुसंधान सेमिनार के दौरान `एन्थ्रोपॉड एण्ड देयर कन्ज़र्वेशन इन इंडिया (इन्सेक्टस एण्ड स्पाईडर्स)` पर एक एनविस बुलेटिन वॉल्यूम 14 जारी किया । इसमें कीटों तथा मकड़ियों के महत्वपूर्ण आदेशों की पुनरीक्षा शामिल थी । वर्ष 2013-14 के दौरान केंद्र की वेबसाईट में तीन नए क्षेत्र शुरू किए गए नामत: `वाईल्ड बाईट्स` जिसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष, दुलर्भ जीव, संरक्षित क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन आदि पर लेख शामिल होते हैं; `नई खोजें क्षेत्र में वन्यजीव तथा संरक्षित क्षेत्रों पर की गई नई खोजों के बारे में जानकारी होती है; `वन्य विज्ञान` क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रकाशित लेखों के बारे में जानकारी होती है । केंद्र की वेबसाइट http://wiienvis.nic.in है ।
  • वानिकी विभाग, पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रबंधन विभाग, सिक्किम सरकार, गंगटोक में एनविस केंद्र : राज्य के इस केंद्र के पास 17 से अधिक राज्य विशिष्ट पर्यावरणीय मानदंडों पर एक डाटाबेस हे । पुनर्गठित वेबसाइट http://sikenvis.nic.in को पर्यावरण तथा संबंधित मुद्दों संबंधी व्यापक जानकारी प्रकाशनों तथा पत्रों सहित अद्यतन बनाया गया है । पांच `गुरू केंद्रों` में से एक होने के कारण सिक्किम एनविस केंद्र ने कई अन्य केंद्रों नामत: डी.एम.आई. भोपाल एनविस केंद्र, झारखंड एनविस केंद्र, बी.एस.आई. कोलकाता एनविस केंद्र, मिजोरम एनविस केंद्र, असम एनविस केंद्र तथा बी.एन.एच.एस. एनविस केंद्र की सीएमएस-चालित वेबसाइट के सृजनात्मक प्रयोग और विषय-वस्तु के पुनर्गठन में सहायता प्रदान की । वर्ष 2013-14 के दौरान केंद्र के अन्य प्रमुख विकासों में अन्य बातों के साथ-साथ 2700 से अधिक आई.एस.बी.ई.आई.डी. अद्यतन; 602 ऑन-लाइन प्रश्नों के उत्तर दिए गए, 210 वास्तविक प्रश्न, 7343 यूनीक वेबसाइट विजिटर, 90471 कुल विज़िट, 160 रजिस्टर्ड साईट प्रयोगकर्ता; विषय आधारित तिमाही न्यूजलेटर का प्रकाशन शामिल है ।
  • सी.पी.आर. पर्यावरण शिक्षा केंद्र, (सी.पी.आर.ई.ई.सी.) चेन्नई में एनविस केंद्र : सी.पी.आर.ई.ई.सी. एनविस ने `भारत की पर्यावरणीय विरासत तथा पवित्र स्थानों का संरक्षण` पर बल दिया है । इसके पास भारत की पर्यावरणीय परम्पराएं पवित्र पौधे, बगीचे, उपवन, पशु, पर्वत, नदियां, जल-निकाय, शहर तथा बीजों के बारे में 9 विशिष्ट घटक विद्यमान हैं । पवित्र उपवनों के बारे में लगभाग 42 उद्धरण हैं जबकि 585 नए पवित्र उपवनों (मध्य प्रदेश में 103 पवित्र वन, जम्मू एवं कश्मीर में 16, उत्तर प्रदेश में 32, उत्तराखंड में 29, गुजरात में 40 तथा केरल में 365) को शामिल किया गया है । संबंधित शीर्षकों के तहत 21 पर्वत, 1 नदी, 14 शहर, 2 बाग तथा 2 बीज को अपलोड किया गया है । लगभग 74 पवित्र जल-निकायों तथा मंदिर के तालाबों को भी अपलोड किया गया है। वेबसाईट http://www.cpreecenvis.nic.in पर अधिसंख्य व्यक्तिगत संवाद के अतिरिक्त लगभग 356766 हिट्स (77851 विश्वव्यापी तथा शेष भारत से) रिकार्ड किए गए हैं। ई-मेल तथा टेलीफोन के माध्यम से प्रश्नों का जवाब दिया गया । सी.पी.आर.ई.ई.सी. द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों की पर्यावरणीय परंपराओं के बारे में नियमित आधार पर जानकारी एकत्रित करना तथा अपने डाटाबेस को अद्यतन बनाना जारी है ।
  • एनविस सेंटर ऑन हाईजीन, सेनीटेशन, सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम्स एण्ड टेक्नॉलोजी (सुलभ एनविस), नई दिल्ली : वर्ष 2013-14 के दौरान एनविस केंद्र ने डाटाबेस के सृजन तथा अद्यतनीकरण संबंधी, नियमित वार्षिक रिपोर्ट, न्यूजलेटर, पुस्तिकाएं तथा प्रश्न-उत्तर संबंधी सेवाओं को प्रकाशित करने संबंधी कार्य किए। केंद्र ने नई दिल्ली के निर्मल भारतीय स्कूल के कक्षा ग्यारह के छात्रों को हैल्थ हाईजीन एण्ड सेनिटेशन पर तीन सप्ताह का वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम उपलब्ध कराया । एनविस केंद्र ने विभिन्न सम्मेलनों/सेमिनारों जैसे कि स्वच्छता के समाज विज्ञान पर प्रथम राष्ट्रीय विशिष्ट व्याख्यान ऋंखला, विश्व स्नानागार दिवस, 2013, `स्वच्छता का समाज विज्ञान : पर्यावरणीय स्वच्छता, लोक स्वास्थ्य तथा सामाजिक वंचना` पर राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ-साथ नई दिल्ली में एक सप्ताह तक चले वॉटर सेक्टर ट्रेनिंग एण्ड कॅपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम में भाग लिया । सुलभ एनविस केंद्र ने पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य को बचाने के लिए विभिन्न स्थानों पर शौचालय बनाने के लिए हाल ही में श्रीलंका के हेल्प-ओ बायोगेस प्रोग्राम के साथ गठबंधन किया है । केंद्र की वेबसाइट (http://sulabhenvis.nic.in) पर हर प्रकार की पर्यावरणीय स्वच्छता तकनीक के बारे में भी जानकारी उपलब्ध है ।
  • राष्ट्रीय वनस्पति विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एन.बी.आर.आई.), लखनऊ में एनविस केंद्र : एन.बी.आर.आई. एनविस, `पौध प्रदूषण के संकेतक` संबंधी एक विषयगत केंद्र, एन.बी.आर.आई. एनविस, ने भारत में विभिन्न पणधारियों के बीच परिचालित करने के लिए `शहरी योजना में पौधे` तथा `नमभूमियों में निर्माण` पर न्यूजलेटर और `ट्रांसजेनिक प्लांटस फॉर फाईटोरेमेडिएशन` पर संदर्भ सूची प्रकाशित की । प्रकृति एवं स्वास्थ्य, वायुमंडलीय पोषण आदि जैसे विभिन्न विषयों पर मासिक ई-न्यूज बुलेंटिन तथा न्यूज बुलेटिन तैयार किए और उन्हें वेबसाइट पर अपलोड किया । बच्चों का कोना, को विभिन्न विषयों के अद्यतन बनाया जैसा कि `जीव विज्ञान-सामान्य ज्ञान`, `प्रदूषण के बारे में जागरूकता` तथा `जलवायु के प्रकार`। केंद्र ने प्रकाशन अनुभाग में एक नए मॉडयूल नामत: `केस स्टडी` को शामिल करते हुए अपनी गतिविधियों के कार्य-क्षेत्र का विस्तार किया । वर्तमान में `फाईटोरेमेडिएशन` पर पांच केस स्टडीज़ को रिकार्ड किया गया है । नवीनतम संदर्भों के साथ संदभ्र-ग्रंथ सूचियों के विभिन्न भागों को अद्यतन किया । वर्ष के दौरान एन.बी.आर.आई.-एनविस वेबसाइट को 44096 हिट तथा 97 प्रश्न प्राप्त हुए जिनमें से सभी का उत्तर दिया गया । `अंदरुनी प्रदूषण`, `सूखा` स्मॉग ओजोन तथा पौधों की भूमिका पर नए डाटाबेस विकसित किए गए । हिंदी वेब पेज सहित एन.बी.आर.आई. एनविस की वेबसाइट (http://nbrienvis.nic.in) के विभिन्न मॉडयूलों को अद्यतन बनाया गया ।
  • जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, (जैड.एस.आई.), कोलकाता में एनविस केंद्र : जेड.एस.आई एनविस `भारत की जीव-जंतु विविधता` विषय पर डिजीटल अनुसंधान जानकारी का मुख्य स्रोत है । इसका डाटाबैंक इस विषय पर सबसे व्यापक एवं प्रमाणिक स्रोत है जो वैज्ञानिकों तथा अनुसंधानकर्ताओं के साथ-साथ भारत तथा विदेशों के नीति-निर्माताओं को सेवाएं प्रदान कर रहा है । यह केंद्र अपनी वेबसाईट (www.zsienvis.nic.in) के माध्यम से जीव-जंतु विविधता संबंधी जानकारी का प्रसार कर रहा है । नियमित प्रकाशनों के अलावा केंद्र ने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की ई-पुस्तिका प्रोम्मालिया (ISSN:2320-4311)भी निकाली है । पत्रिका के सभी प्रकाशित शोधपत्र, जू बैंक से पंजीकृत हैं ।
  • पर्यावरण प्रंबंधन एवं नीति संस्थान (ई.एम.पी.आर.आई.), बंगलुरू में एनविस केंद्र : `पर्यावरण तथा संबंधित मुद्दों की स्थिति` विषय पर बल देने वाले इस राज्य केंद्र की एक समर्पित वेबसाइट karenvis.nic.in है जिसका संचालन एन.आई.सी करती है और इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है। यह वेबसाइट हरित जानकारी, पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट, एनविस न्यूजलेटर, न्यूज बुलेटिन नेशनल डाटाबेस (आई.एस.बी.ई.आई.डी) तथा कर्नाटक में स्थापित ईको-क्लब के साथ अद्यतन किया जाता है। यह केंद्र वायु प्रदूषण तथा प्रदूषक, ई.एम.पी.आर.आई. द्वारा झील संरक्षण रणनीति, ई.एम.पी.आर.आई. द्वारा ई-अपशिष्ट अध्ययन प्रायोगिक परियोजना आदि जैसे विषय पर `परिसर` नामक न्यूजलेटर प्रकाशित करता है। आई.एस.बी.ई.आई.डी पर सभी 17 मॉडयूल्स पर डाटा अद्यतन किया गया है। 4000 से अधिक शीर्षकों वाले एक पुस्तकालय को भी डिजिटलाईज्ड कर दिया गया है ।
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी प्रकोष्ठ, वन एवं पर्यावरण विभाग, मणिपुर राज्य सरकार, इम्फाल में एनविस केंद्र : यह केंद्र मणिपुर से संबंधित `पर्यावरण एवं संबंधित मुद्दों` के बारे में जानकारी रखता है और अद्यतन करता रहता है । यह केंद्र क्षेत्रीय पर्यावरणीय डाटाबेस विकास, विशेषज्ञ डाटाबेस का विकास, उद्धरण डाटाबेस, क्षेत्रीय पर्यावरणीय सूचना प्रणाली के प्रबंधन, वेबसाइट विषयसूची प्रबंधन, आई.एस.बी.ई.आई.डी. के लिए डाटा संग्रहण तथा संपादन, तिमाही न्यूजलेटर,रिपोर्ट आदि जैसे प्रकाशनों के माध्यम के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जानकारी का प्रचार-प्रसार करता है। इसकी वेबसाइट http://manenvis.nic.in पर मणिपुर राज्य के पर्यावरण संबंधी विषयों पर प्रकाशित अनुसंधान पत्र, मणिपुर की दैनिक पर्यावरण संबंधी समाचार की कतरनें तथा मणिपुर का दैनिक जिला स्तरीय मौसम संबंधी डाटा अपलोड किया जाता है । इसके अलावा मणिपुर के वनस्पति एवं जीव-जंतु जगत की एक डिजिटल लाईब्रेरी भी विकसित की गई है । यह केंद्र अधिकांश राज्य सरकारी, एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों, संस्थानों, व्यक्तियों आदि को राज्य संबंधी पर्यावरणीय जानकारी उपलब्ध कराता है ।

महत्वपूर्ण समितियां/आयोग

एनविस की वैज्ञानिक सलाहकार समिति (एसएसी) जो स्कीमों के कार्यकरण का पर्यवेक्षण तथा निगरानी करती है का पुनर्गठन दिनांक 9 अप्रैल, 2012 को हुआ था। एसएसी की अध्यक्षता सचिव (पर्यावरण एवं वन) द्वारा की जाती है तथा इसमें 4 अन्य अधिकारी (वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव या उनके प्रतिनिधि, ईआई प्रभाग से संबंधित अपर सचिव, अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार और आर्थिक सलाहकार (ईआई प्रभाग, जो सदस्य सचिव की तरह कार्य करते हैं) तथा 5 गैर-सरकारी सदस्य या विशेषज्ञ होते हैं जिनका चयन पर्यावरण एवं वन मंत्री के अनुमोदन से किया जाता है। सचिव (पर्यावरण एवं वन) की अध्यक्षता में दिनांक 7 जुलाई 2014 को एक बैठक आयोजित की गई थी।

भागीदारी की प्रकृति, विचार-विमर्श किए गए विषयों, परिणामों तथा परिणामों पर की गई कार्रवाई/कार्यान्वयन सहित सम्मेलन

एनविस केन्द्रों की पांचवी राष्ट्रीय मूल्यांकन कार्यशाला का आयोजन दिनांक 28 से 30 मार्च, 2014 को गंगटोक, सिक्किम में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वर्ष 2013-14 में 68 एनविस केन्द्रों के कार्य निष्पादन का मूल्यांकन करना था, इन केन्द्रों में से 28 का संचालन राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्र प्रशासनों द्वारा किया जाता है। कार्यशाला में लगभग 125 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें से 90 प्रतिनिधि तो 36 विषयक एनविस केन्द्रों (कुल 40 विषयगत एनविस केन्द्र) से थे तथा 21 प्रतिनिधि 28 राज्य/संघ शासित एनविस केन्द्रों से थे। केन्द्रों का मूल्यांकन मंत्रालय द्वारा गठित की गई दो स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों द्वारा किया गया जिनमें से एक राज्य/संघ शासित केन्द्रों के लिए थी तथा दूसरी विषयगत केन्द्रों के लिए थी। प्रतिभागी एनविस केंद्रों ने अपनी 2013-14 की गतिविधियों को प्रदर्शित किया और अपने विषय संबंधी डाटा संग्रहण, संकलन, सत्यापन तथा डाटा अद्यतन पर प्रकाश डाला विशेषत: नए विकसित डाटाबेस तथा प्रकाशन/सूचना उत्पाद प्रस्तुत किए। केन्द्रों ने एनविस गतिविधियों को पूरा करने के दौरान वर्तमान में सामने आने वाली विभिन्न तकनीकी, वित्तीय तथा प्रशासनिक कठिनाइयों पर भी प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने स्कीम के दिशानिर्देशों में दिए गए मानदंडों, जिनमें वेबसाईट अद्यतन, डाटाबेस विकास, न्यूजलेटर/रिपोर्ट/अन्य जानकारी उत्पादों का प्रकाशन, विजीटर काउंटर्स के माध्यम से प्राप्त प्रयोगकर्ता की संलिप्तता तथा संवाद तथा प्रश्न-उत्तर सांख्यिकी, नई पहलें, जानकारी/आंकडों के अंतर को भरने के लिए की गई कार्रवाई आदि शामिल हैं, के आधार पर विभिन्न्न केन्द्रों का मूल्यांकन किया। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले नियमित तथा आवधिक ऑनलाईन मूल्यांकन के साथ-साथ वास्तविक सत्यापन के माध्यम से किए गए मूल्यांकन के साथ मिलाया जाएगा तथा केन्द्रों को अगले वित्त वर्ष 2014-15 के लिए निधियों के अनुदान पर विचार किए जाने से पहले ही वर्ष 2013-14 में उनकी गतिविधियों के एवज में मिलने वाले समेकित अंकों के आधार पर श्रेणी क: बहुत अच्छा (>80), ख: अच्छा (>50 तथा <80) तथा ग: गैर-निष्पादक (<50) ग्रेड दिए जाएंगे। समितियों ने एनविस केन्द्रों की कार्यशीलता को बेहतर बनाने तथा समग्र एनविस योजना में सुधार के लिए कतिपय सिफारिशें भी कीं।

68 एनविस केन्द्रों को एनविस योजना के तहत  वार्षिक अनुमोदन और प्लान फंड जारी होने की  तुलनात्मक स्थिति

फंड जारी किये गए एनविस केन्द्रों की संख्या (25.08.2014 तक)

फंड जारी  (25.08.2014 तक)