परिचय

आर्थिक प्रकोष्ठ के कार्य

मंत्रालय के आर्थिक प्रकोष्ठ की अध्यक्षता, वरिष्ठ सलाहकार के अधिवीक्षण के तहत कार्यरत आर्थिक सलाहकार द्वारा की जाती है। इस प्रकोष्ठ के निम्नलिखित उत्तरदायित्व हैं:

  • मंत्रिमंडल/मंत्रिमंडल समितियों (मंत्रिमंडल नोट) तथा सचिवों की समितियों से संबंधित सभी मामले तथा विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त नीतिगत मामलों पर टिप्पणी उपलब्ध कराना।
  • मंत्रालय में आंतरिक तथा बाहरी आर्थिक प्रबंधन संबंधी सभी मामले तथा पर्यावरण एवं वानिकी क्षेत्रों में सुधार।
  • पर्यावरणीय अर्थशास्त्र में उत्कृष्ट केन्द्र, मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, चेन्‍नई की कार्य योजनाओं का निरुपण, कार्यान्वयन तथा मॉनीटरिंग।
  • हरित जन अधिप्राप्ति दिशानिर्देश तैयार करना।
  • वित्तीय प्रोत्साहनों से संबंधित पर्यावरण अनुकूल प्रस्तावों की समीक्षा तथा केन्द्र के बजट प्रस्ताव में उन्हें शामिल करने की सिफारिश करना।
  • वित्त मंत्री के बजट भाषण, वित्त मंत्रालय के सर्वेक्षण आदि के लिए सामग्री उपलब्ध कराना।
  • वित्त मंत्रालय द्वारा संदर्भित सभी मामलों के संचालन एवं समन्वय के लिए नोडल प्रभाग के रूप में कार्य करना।
  • केन्द्र बजट में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से संबंधित विशिष्ट घोषणाओं के कार्यान्वयन की मॉनीटरिंग के लिए नोडल प्रभाग।
  • तेरहवें वित्त आयोग द्वारा संस्तुत की गई राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए राहत अनुदान जारी करने तथा उपयोग करने की जांच करने के लिए क्षेत्रीय समिति का सचिवालय।
  • राजकोषीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के तहत अनुपालन।
  • जेंडर बजटिंग संबंधी संबंधी मुद्दे।
  • नीतिगत मामलों पर संसद में प्रश्न।

मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, चेन्नई

प्रस्तावना

पर्यावरणीय अर्थशास्त्र में उत्कृष्टता का केंद्र,  मद्रास स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स (एमएसई), चेन्नई की स्थापना वर्ष 2002 में मंत्रालय की ”उत्कृष्टता के केंद्र” (सीओई) योजना के अंतर्गत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय  तथा मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के बीच हुए  समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आधार पर हुई। इसका  उद्देश्य पर्यावरण के आर्थिक पहलुओं पर ध्यान देते हुए राष्ट्रीय महत्व के मुद्दद्दों का समाधान करना है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान समझौता ज्ञापन का विस्तार किया गया तथा इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना तक जारी रखने का भी निर्णय लिया गया। यह उत्कृष्टता केंद्र आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रशासनिक प्रभार के अंतर्गत काम करता है। मंत्रालय का वरिष्ठ सलाहकार एमएसई के शासकीय बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करता है।

उत्कृष्टता केंद्र की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत  एम एस ई को समझौता ज्ञापन के तहत गठित संचालन समिति (स्टियरिंग कमेटी) की सिफारिशों पर बनी उसकी कार्य योजना के अनुसार प्रत्येक वर्ष योजनागत निधि  का आबंटन किया जाता है। इस रहनुमाई समिति के अध्यक्ष मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार होते हैं तथा  एमएसई के संचालक एवं अन्य विशेषज्ञों के अलावा  इसके सदस्यों में अपर सचिव, वित्तीय सलाहकार  व आर्थिक सलाहकार शामिल होते हैं। केंद्र को,  अनुसंधान अध्ययन कराने, परियोजनाओं के निष्पादन, कार्यशाला एवं संगोष्ठयां आदि का आयोजन करने  तथा उसकी वेबसाइट का रखरखाव करने हेतु  अनुमोदित व्यय के खर्च हेतु परियोजना विशेष मोड में  निधि जारी की जाती है।

शुरूआत से लेकर विगत वर्ष के अंत तक किए गए क्रियाकलाप : संचयी कार्य निष्पादन 

महत्वपूर्ण अनुसंधान और अध्ययन उत्पादों में दो अनुसंधान रिपोर्टे हैं जो पुस्तकों के रूप में प्रकाशित  किए गए, ये निम्नलिखित हैं :

  • ”इको – टैक्सेस फॉर पोल्यूशन इनपुट्स एंड आउटपुट्स”, आर. जे. चलैय्या, यू. शंकर, पॉल पी. अप्पासामी और रीता पाण्डे द्वारा लिखित, वर्ष 2007 में एकैडिमिक फाउन्डेशन द्वारा प्रकाशित।
  • ”ट्रेड एंड इनवायरनमेंट : ए स्टडी ऑफ इंडियाज़  लेदर एक्सपोर्ट” यू. शंकर एवं अन्य द्वारा लिखित, वर्ष 2006 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित।

जनवरी 2009 में व्यापक वस्तु एवं सेवा कर  (जी.एस.टी) लाकर भारत के अप्रत्यक्ष कराधान में  परिवर्तन के पूर्वानुमान में तथा प्रस्तावित जी.एस.टी व्‍यवस्था के भाग के रूप में पर्यावरणिक करों को शामिल किए जाने के लिए 13वें वित्त आयोग के समक्ष अपने  ज्ञापन के माध्यम से मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के मद्देनजर मंत्रालय ने 0.06 करोड़ रू . की लागत से  जनवरी, 2009 में सी.ओ.ई. – एम.एस.ई. को 6 महीने  का एक अध्ययन स्वीकृत किया। इस अध्ययन का  व्यापक उद्देश्य प्रस्तावित जी ए़स ट़ी व्‍यवस्था में पर्यावरणिक करों के लिए पर्याप्त स्थान प्रदान करना  था जो यथा आवश्यक पाई गई पारि – सब्सिडियों द्वारा सम्पूरित हो।  सी.ओ.ई. – एम.एस.ई. द्व़ारा एक प्रारूप  चर्चा पत्र अगस्त 2010 में प्रस्तुत किया गया और  टिप्पणियों एवं सुझावों के आधार पर सी.ओ.ई. – एम.एस.ई.  ने वर्ष 2010-11 में ”कोपिंग विद पोल्यूशन : इको – टैक्सेस  इन ए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जी.एस.टी.) रेजिम – ए डिस्कशन पेपर” नामक एक अन्य महत्वपूर्ण रिपोर्ट  प्रस्तुत की। वर्ष 2012 – 13 के दौरान केंद्र ने (1) ‘इंडिया 2030 – विजन फार एन इनवायरमेंटली सस्टेनेबल फ्यूचर’, विश्व बैंक की एक रिपोर्ट : (2) ‘नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग पॉलिसी (3)’रोड मैप फार ग्रीन नेशनल एकाउंटिंग  सिस्टम’ : तथा (4) ‘यूनियन बजट 2012-13’ के  बारे में मंत्रालय को नीतिगत इनपुट प्रदान किए हैं। चल  रही अन्य क्षमता निर्माण परियोजनाओं में से ‘डायग्नोस्टिक असेस्मेंट ऑफ इनवायरमेंटल चाइलेंजेज फेसिंग इंडिया’  के बारे में मंत्रालय को अपनी हाल की रिपोर्ट के बारे में  विश्व बैंक द्वारा एक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। केंद्र ने वर्ष 2012-13 की अंतिम तिमाही में लैनकास्टर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट स्कूल के साथ मिलकर  पर्यावरणिक अर्थशास्त्र पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया।

अनुमानित क्रियाकलापों, वास्तविक एवं वित्तीय लक्ष्यों और वास्तविक कार्य निष्पादन सहित वर्ष 2013-14 में कार्य निष्पादन/उपलब्धियां/ प्रगति

वर्ष 2013-14 के दौरान केंद्र ने निम्नलिखित के बारे  में मंत्रालय को नीतिगत इनपुट प्रदान किए हैं :-

  • 14वें वित्त आयोग को उसके विचारार्थ विषयों के बारे में मंत्रालय का इनपुट प्रतिपादित करने के लिए तैयार किया गया नीतिगत नोट अप्रैल, 2013 में मंत्रालय को प्रस्तुत किया गया ।
  • भारत में चुनिंदा पर्यावरणिक चुनौतियों के नैदानिक मूल्यांकन के अंतर्गत विश्व बैंक अध्ययनों तथा समावेशी धन रिपोर्ट 2012 के बारे में टिप्पणियों सहित 2 नीतिगत नोट क्रमश: मई और जुलाई, 2013 में मंत्रालय को प्रस्तुत किए गए।

वर्ष 2013-14 में (31.03.2014 तक) अनुसंधान परियोजनाएं

  • इसने ”ट्रेड एंड इन्वायरनमेंट : इंडिया एक्सपोर्ट ऑफ टेक्सटाइल एंड टेक्सटाइल प्रोडक्टस एंड एनवायरनमेंटल रिक्वायरमेंटस” पर मसौदा रिपोर्ट तैयार की है। चमड़ा निर्यात पर अध्ययन से हुए अनुभव के आधार पर यह अध्ययन यूरोपीय संघ एवं संयुत्त राज्य अमेरिका सहित अनेक आयातित देशों के बढ़ते पर्यावरणीय विनियमनों के संदर्भ  में भारत के वस्त्र निर्यात पर ध्यान केंद्रित करता  है। यह अध्ययन भारत में वस्त्र उद्योग की प्रगति  हेतु एक सक्षम नीति माहौल बनाने के उद्देश्य से उद्योग की संरचनात्मक समझौता संबंधी कठिनाइयों, वैश्विक पूर्ति श्रृंखला एवं पर्यावरणीय अनुपालना जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करता है। यह अन्य बातों के साथ-साथ भारत के वस्त्र उद्योग में प्रदूषण कम करने की स्थिति, भारतीय वस्त्र उद्योग की कारोबारिक प्रतिस्पर्धा, वस्त्र उद्योग में प्रदूषण कम करने की लागत का आकलन (वस्त्र प्रसंस्करण पर ध्यान देने के साथ) तथा प्रदूषण कम करने व वस्त्र कारोबार के बीच संबंधों का भी समाधान करता है। अध्ययन को 0.2089 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत पर जुलाई, 2008 से शुरू होकर 2 वर्षों में पूरा किया जाना था। रिपोर्ट अत्तूबर, 2012 में सौंपी गई है और अभी मंत्रालय के विचाराधीन है।
  • केंद्र ने अत्तूबर, 2010 में शुरू हुई 18 महीने की परियोजना ”इकोनॉमी वाइड इम्पैक्टस ऑफ  पॉल्यूशन इन इंडिया : मैटा एनालिसिस” पर अपना कार्य जारी रखा है। परियोजना का लक्ष्य प्रदूषण के कुल प्रभाव के मैक्रो स्तर के अनुमानों का आकलन  करने हेतु भारत में वायु एवं जल प्रदूषण से संबंधित विभिन्न पर्यावरणीय मूल्यांकन अध्ययनों का मैटा एनालिसिस करना है। मार्च 2013 में आयोजित समीक्षा कार्यशाला में की गई टिप्पणियों और सुझावों को शामिल करने के बाद अक्तूबर 2013 में मंत्रालय को अंतिम रिपोर्ट का प्रारूप प्रस्तुत किया गया। अंतिम रिपोर्ट के प्रारूप को एम.एस.ई. द्वारा टिप्पणियों/सुझावों के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ  समीक्षा हेतु तथा मंत्रालय द्वारा भी संबंधित विषय विशेषज्ञों को भेजा गया।

प्रसार पत्र

  • वर्ष 2013 – 14 के लिए संचालन समिति द्वारा  अभिज्ञात 4 प्रसार पत्र पूरे किए गए अर्थात ‘इकोनोमिक्स ऑफ बायोडायवर्सिटी कंजरवेशन’, ‘स्टेटिस्टीकल वैल्यू लाइफ’, ‘च्वाइस ऑफ पोल्यूशन कंट्रोल  इन्स्ट्रूमेंट’ तथा ‘एनर्जी – इकोनॉमी एनवायरमेंट मॉडल्स’ ।

समाचारपत्र : ”ग्रीन थॉटस” (द्वि-वार्षिक प्रकाशन)

  • केंद्र द्वारा उसके अनुमोदित 2013-14 हेतु वार्षिक  कार्य योजना के अनुसार दो अंक प्रकाशित किए गए।

आगंतुक रिसर्चर फेलोशिप कार्यक्रम

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य जैसाकि एम एस ई के विज़न डॉक्यूमेंट, 2012-17 में अंकित है, प्रत्येक वर्ष कम से कम एक रिसर्चर को केंद्र में कुछ महीने गुजारने के लिए आमंत्रित करना है। कार्यक्रम को 2008 में अनुमोदित किया गया।
  • डॉ. सुनिता सुब्रमनियम, वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता, यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी, इन्स्टीच्यूट ऑफ  एडवांस्ड स्टडीज, टोकियो को वर्ष 2013 के ग्रीष्म काल के दौरान आगंतुक अनुसंधानकर्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने सितम्बर – अक्तूबर, 2013 के दौरान अपना कार्यकाल पूरा किया और 4 नवम्बर, 2013 को ‘द इकोनॉमिक्स ऑफ बायोडायवर्सिटी एंड इको सिस्टम्स : फाइडिंग रिजन्स टू सेक्योर योर फूड, हेल्थ एंड वेलबिइंग’ पर एक सार्वजनिक सेमिनार किया।
  • प्रोफेसर पिटर लेम्बर्ट ने जनवरी- फरवरी 2014 के दौरान केंद्र का दौरा किया था। इस प्रकार केंद्र ने आवंटित बजट के भीतर वर्ष 2013-14 के दौरान  दो आगंतुक अनुसंधानकर्ताओं को बुलाया।

पर्यावरणीय अर्थशास्त्र संबंधी वेबसाइट

  • केन्द्र की अत्याधुनिक वेबसाइट http://coe.mse.ac.in  को और अधिक प्रयोत्ता अनुकूल बनाने के लिए इसे अद्यतन किया गया है। पर्यावरणीय इकोनॉमिक्स साहित्य संबंधी डाटाबेस में वृद्धि हेतु प्रयास किए गए हैं। अनेक भारतीय अध्ययनों को भी डाटाबेस में शामिल किया गया है। यह वेबसाइट भारत में पर्यावरणीय इकोनॉमिक्स में रूचि रखने वाले प्रयोत्ताओं हेतु ‘वन-स्टॉप’ गंतव्य के रूप में सेवा प्रदान कर रही है। संदर्भित पत्र-पत्रिकाओं में  प्रकाशित लगभग 7500 लेखों को पर्यावरणीय इकोनॉमिक्स और संसाधन इकोनॉमिक्स के  विभिन्न उप-विषयों में वर्गीकृत किया गया है। यह अवलोकन योग्य डाटाबेस प्रकाशन सूचना और उद्धरण तक पहुंच के लिए प्रयोत्ता को सक्षम बनाता है तथा व्यापक साहित्य समीक्षा करने का अवसर भी प्रदान करता है।
  • अप्रैल 2013 को आयोजित संचालन समिति की बैठक के सुझाव निम्नलिखित थे। (i) बेवसाइट पर परियोजना के रिपोर्टो का सारांश प्रस्तुत करना। (ii) विषय को एक महीने की प्रारंभिक अवधि में चिन्हित करना और वेबसाइट पर आकर्षक तारीके से संबंधित सूचना डालना। वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए केंद्र को ‘जलवायु परिवर्तन अनुकूलन’ तथा ‘वायु प्रदूषण के प्रभाव’ पर एक बिबलियोग्राफिक सीरिज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया था जो समय-सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम

एमएसई के विजन डॉक्यूमेंट 2012-17 के तहत प्रत्येक वर्ष पर्यावरणीय अर्थशास्त्र से जुड़े मुद्दों पर कम से कम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम या तो मंत्रालय के वित्तपोषण अथवा अन्य स्रोतों के माध्यम से आयोजित करवाना है। चालू वर्ष 2013-14 के लिए केंद्र ने त्रिपुरा विश्वविद्यालय अगरतला में 6 से 8 नवम्बर, 2013 के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ‘पर्यावरणिक राजस्व सुधार : अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और भारत के लिए  इसका महत्व’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन वाणिज्य विभाग, त्रिपुरा विश्वविद्यालय  के सहयोग से किया गया और इसका उद्घाटन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में वरिष्ठ आर्थिक  सलाहकार द्वारा किया गया। केंद्र ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफलता पूर्वक पूरा होने पर नवम्बर 2013 के पहले सप्ताह में मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

वर्ष 2013-14 के दौरान बजट आवंटन

वर्ष 2013-14 के लिए सी.ओ.ई. – एम.एस.ई. का  बजट अनुमान 0.51 करोड़ रू. तथा संशोधित अनुमान  0.55 करोड़ रू. था। वर्ष के दौरान 0.4822 करोड़ रू. की  कुल राशि जारी की गई थी जिसमें वर्ष 2012-13 के  लिए देय 0.0379 करोड़ रू. आगंतुक अनुसंधानकर्ता  कार्यक्रम के लिए 0.0197 करोड़ रू. तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 0.0267 करोड़ रू. शामिल है।