आईएफडी के कार्य की मुख्य मदें


निम्नलिखित से संबंधित सभी प्रस्तावों का वित्तीय दृष्टिकोण से जाँच करना तथा वित्तीय सलाह देना:

1. पदों का सृजन, निरंतरता एवं कनवर्जन |

2. नई स्कीमें/ परियोजनाएं तैयार करना एवं उनकी प्रगति का मूल्यांकन करना |

3. स्थायी वित्त समिति, व्यय वित्त समिति, मंत्रिमंडल इत्यादि की स्वीकृति के लिए मामलों पर कारवाई करना |

4. विभिन्न संगठनों, संस्थानों, एनजीओ, अधीनस्थ प्राधिकरणों को अनुदान जारी करना|

5. अधीनस्थ प्राधिकरणों को शक्तियों का पुन: प्रत्यायोजन |

6. विदेश में प्रतिनियुक्ति/प्रत्यायोजन |

7. निष्पादन बजट tतैयार करना एवं मुद्रण |

8. वित्त मंत्रालय/कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के साथ सम्पर्क करना |

एकीकृत वित्तीय सलाहकार

भूमिका एवं तर्कशास्त्र

  • 1975 में आंतरिक वित्त सलाहकार तथा सहयोगी वित्त सलाहकार को मिलाकर करके प्रणाली का शुभारंभ किया गया (आईएफए: प्रत्यायोजित क्षेत्र से बाहर के मामलों में बजट एवं लेखा के प्रभारी, सहायक वित्त सलाहकार की सलाह ली जाएगी) |
  • उद्देश्य यह था कि आएफए मंत्रालय के योजना बनाने, कार्यक्रम बनाने, बजट बनाने, निगरानी करने, मूल्यांकन करने जैसे कार्यों में अधिक सामूहिक तथा रचनात्मक भूमिका निभाए |
  • प्रशासनिक मंत्रालय और वित्त मंत्रालय दोनों के प्रति उत्तरदायी है, प्रत्यायोजित शक्तियों का उपयोग करने के लिए मुक्त है लेकिन प्रत्यायोजित क्षेत्र से बाहर की शक्तियों के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रति उत्तरदायी है |
  • बजट तैयार में सहायता करना, वित्त मंत्रालय की स्वीकृति के लिए परियोजनाओं एवं कार्यक्रम की जांच करने की भूमिका का निर्वहन करना |
  • बजट-पश्चात सतर्कता रखना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बजट के परिव्यय में कोई विचलन न हो |
  • मुख्य विशेषताएं :
    • आईएफए का चयन मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा |
    • अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पृष्ठभूमि और प्रशिक्षण वित्त और लेखों में होनी चाहिए और उनकी नियुक्ति आईएफ के साथ परामर्श से की जाएगी|
    • आईएफए प्रशासनिक मंत्रालय से कार्य करेगा |
    • प्रत्यायोजित शक्तियों के उपयोग से पहले सभी मामलों में आईएफए से परामर्श किया जाना चाहिए. हालांकि, सचिव उसकी सलाह को रद्द कर सकता है |
    • आईएफए के दायित्वों एवं कार्यों में परिवर्तन के लिए, वित्त मंत्रालय की स्वीकृति आवश्यक है |