अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सतत् विकास (आईसीएंडएसडी)

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द्विपक्षीय समझौते / संयुक्त वक्तव्य


पर्यावरण के क्षेत्र में द्विपक्षीय अनुबंध / संयुक्त वक्तव्य / समझौता ज्ञापन

भारत गणराज्य की सरकार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के माध्यम से निम्नलिखित देशों/मंचों के साथ द्विपक्षीय समझौते/ संयुक्त वक्तव्य/ समझौता ज्ञापन में प्रवेश किया है.

प्रत्येक के संबंध में वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

स.क् देश/ मंच समझौता ज्ञापन/संयुक्त वक्तव्य की स्थिति (सक्रिय अथवा निष्क्रिय)
 1 कनाडा सक्रिय (संयुक्त वक्तव्य)
 2 यू.के. सक्रिय (संयुक्त वक्तव्य)
 3 यूएसए सक्रिय (समझौता ज्ञापन)
 4 नॉर्वे सक्रिय (समझौता ज्ञापन)
 5 डेनमार्क सक्रिय (समझौता ज्ञापन )
 6 स्वीडन सक्रिय (समझौता ज्ञापन)
 7 यूरोपीय संघ भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम के संयुक्त कार्यवाही योजना में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय  के तीन घटक हैं, (जिसके लिए नोडल मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय है).
 8 भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन भारत अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के सहयोग के ढ़ांचे के अंतर्गत एमईए और अफ्रीकी संघ के बीच एक संयुक्त कार्यवाही योजना तैयार की गई है, जिसमें एक घटक पर्यावरण का भी है.
 9 आईबीएसए सक्रिय (समझौता ज्ञापन)
 10 फिनलैंड भारत फिनलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग (वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत) के ढ़ांचे के तत्वाधान में जेडबल्यूजी की नियमित बैठक आयोजित की जाती है.
 11 मिस्त्र समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए कैबिनेट की स्वीकृति मांगी जा रही है.
 12 मोरक्को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए कैबिनेट की स्वीकृति मांग ली गई है. जल्दी ही हस्ताक्षर होने की संभावना है.
 13 स्विट्ज़रलैंड मसौदा समझौता ज्ञापन तैयार किया जा रहा है.
 14 जर्मनी समझौता ज्ञापन पर 09.08.1998 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता- 5 वर्ष, बढ़ाने योग्य-5 वर्ष). 2003 में समाप्त.
 15 इरान निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 18.04.1995 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता- निर्दिष्ट नहीं).
 16 इज़राइल निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 09.09.2003 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 17 मॉरीशस निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 31.03.2005 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 18 नीदरलैंड निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 18.01.1988 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 19 रूस निष्क्रिय. समझौते पर 30.06.1994 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता- 5 वर्ष, 5 अतिरिक्त वर्ष के लिए  बढाया जा सकता है). 1999 में समाप्त.
 20 ऑस्ट्रिया निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 13.01.1994 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 21 ताजिकिस्तान समझौता ज्ञापन पर 12.12.1995 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता- 5 वर्ष, 5 अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाने योग्य). 2000 में समाप्त.
 22 तुर्कमेनिस्तान निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 25.02.1997 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 23 वियतनाम निष्क्रिय. समझौता ज्ञापन पर 08.03.1997 को हस्ताक्षर किए गए. (वैधता-सतत्).
 24 सार्क सार्क ने दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी) के साथ जुलाई 2004 में; संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के साथ जून 2007 में; और संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण रणनीति (यूएनआईएसडीआर) पर सितंबर 2008 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यूएनएफसीसीसी सचिवालय के निरीक्षक के रूप में सार्क को मान्यता देने की प्रक्रिया पर कार्रवाई  की जा रही है ताकि सार्क को पक्षों के सम्मेलन की बैठक में भाग लेने हेतु समर्थ बनाया जाए|

जिन देशों में गतिविधियां जारी हैं, वे नीचे दिए गए हैं:

कनाडा

(१) पर्यावरण सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर 13.03.2003 को हस्ताक्षर किए गए (31.03.2008 तक वैध).

(२) पर्यावरण सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य पर 17 सितंबर 2007 को हस्ताक्षर किए गए

वर्तमान गतिविधियां

जून २००९ में संयुक्त कार्य समूह की बैठक हुई थी. इस बैठक में चर्चा किए गए अनुसार अनुसरण की कार्यवाहियां की जा रही हैं| इस बैठक में वायु प्रदूषण और पारा वायु उत्सर्जन, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और ऊर्जा साझेदारी, वन्यजीवन, जैव विविधता और जैव सुरक्षा पर चर्चा की गई थी. कार्य योजना क्रियान्वयन के भाग के रूप में कनाडा और भारत अगले चरणों की सामूहिक पहचान करेंगे और उपयुक्त तंत्र तथा स्थलों के अंतर्गत कार्य के लिए परियोजना प्रस्ताव विकसित करेंगे. पर्यावरण पर भारत-कनाडा मंच की पिछली बैठक 18-19जून, 2009 को कनाडा में हुई थी. अगली बैठक सितंबर 2010 में नई दिल्ली में होगी. (भारतीय वैज्ञानिकों/अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए, वायु गुणवत्ता निगरानी में एक कार्यशाला आयोजित की जा रही है).

यूके

सतत् विकास पर भारत-यूके उच्च स्तरीय संवाद पर ११ अक्टूबर 2005 को हस्ताक्षर किए गए. सन् 2008 में इसकी वैधता 2011 तक बढ़ा दी गई है.

वर्तमान गतिविधियां

देशों के बीच यूके-भारत सतत् विकास संवाद के रूप में सहयोग मौजूद है. पिछली बैठक 24.11.2009 को हुई थी जिसमें विभिन्न परियोजनाओं पर चर्चा की गई थी. डेफ़रा, यूके की ओर से कार्यान्वयन एजेंसी है और एमओईएफ के साथ सहयोग करने वाले इस संवाद में मुख्य अंशधारक है. उन परियोजनाओं की संख्या और उनके नाम जिन पर हम कार्य कर रहे हैं. कॉर्पोरेट, सामाजिक उत्तरदायित्व छोड़ें.

यूएसए

संयुक्त राज्य पर्यावरण रक्षण एजेंसी (यूएसईपीए) और एमओईएफ के बीच 16.01.02 को 5 वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. अप्रैल 2007 में इसे अतिरिक्त 5 वर्ष के लिए पुनर्जीवित कर दिया गया था.

वर्तमान गतिविधियां

संयुक्त राज्य पर्यावरण रक्षण एजेंसी (यूएसईपीए) के प्रतिनिधि-मंडल ने वायु और जल गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रशासन तथा खतरनाक अपशिष्ट के प्रबंधन पर कार्य योजना पर चर्चा करने के लिए एमओईएफ अधिकारियों से भेंट की थी. जनवरी 2010 में एक भारतीय प्रतिनिधि-मंडल यूएसईपीए के अनुसरण में राष्ट्रीय पर्यावरण रक्षण प्राधिकरण बनाने के लिए अमेरिका गया था.

12.01.2010 को एक अमेरिकी वन सेवा प्रतिनिधि-मंडल ने अपने भारतीय समकक्षों के साथ भी बैठक की थी. इस बैठक में वन परिरक्षण, जल-विभाजक प्रबंधन, पारिस्थितिकी पर्यटन, सुरक्षित क्षेत्र प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन एवं कार्बन अधिग्रहण, सतत् प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एवं शहरी वानिकी इत्यादि की चर्चा की गई थी.

नॉर्वे

संयुक्त सहयोग आयोग की स्थापना के लिए 6 जुलाई 2004 को एक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्ष्ज्ञर किए गए थे.

वर्तमान गतिविधियां

अक्टूबर 2009 में चौथी जेडबल्यूजी बैठक ओस्लो में हुई थी और द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई थी. इस मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संबंधित विषय प्रभागों से आवश्यक अनुसरण कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है. सहयोग बढ़ाने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों की पहचान की गई है:

1. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर ऊर्जा  द्वारा ग्रामीण विद्युतीकरण से संबंधित परियोजना का विकास.

2. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, चेन्नई में जैव विविधता नीति एवं कानून केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव |

3. स्टेनोपाइन, नॉर्वे (नॉर्वे परामर्श कंपनी) में पारिस्थितिकी-ग्राम तथा पारिस्थितिकी व्यवसायिक परियोजनाओं का प्रस्ताव

4. सिनटेफ द्वारा खतरनाक अपशिष्ट का भस्मीकरण.

अगली (5वीं) बैठक नवंबर, 2010 में हुई |

डेनमार्क

समझौता ज्ञापन पर 11-9-2009को हस्ताक्षर किए गए थे. आरंभिक वैधता 5 वर्ष की थी और स्वतः  ही  से अतिरिक्त नवीनीकरण 5 वर्षों के लिए है. भारत-डेनमार्क संयुक्त आयोग (वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत) की पहली बैठक 11.03.2012 को हुई थी और संयुक्त आयोग के अंतर्गत शामिल  किए गए क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रबंधन में सहयोग शामिल है.

स्वीडन

समझौता ज्ञापन पर 05.11.2009 को सतत् वैधता के साथ हस्ताक्षर किए गए थे.

वर्तमान गतिविधियां

जेडबल्यूजी की पहली बैठक शीघ्र होना प्रस्तावित है. इससे पहले, भारतीय-स्वीडिश ज्ञान सुविधा की परियोजना समिति की बैठक एसआईडीए और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ नियमित रूप से होती थीं. पिछली बैठक २३.११.२००९ को हुई थी जिसमें अन्य बातों के साथ ही पुणे नगरपालिका निगम के सहयोग से बायो गैस परियोजनाओं पर चर्चा करके स्वीकृति दी गई.

यूरोपीय संघ

भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम की संयुक्त कार्यवाही योजना में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का एक घटक है, जिसका नोडल मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का वाणिज्य विभाग है. इस मंत्रालय के संबंध में साझेदारी कार्यक्रम में कवर की गई मुख्य समस्याएं इस प्रकार हैं:

· जलवायु परिवर्तन पर यूएन फ्रेमवर्क सम्मेलन, क्योटो और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल; जैविक विविधता पर यूएन सम्मेलन, पर आपसी समझ बनाना

· पर्यावरण पर संयुक्त कार्य समूह की वार्षिक आधार पर बैठकों का आयोजन करना और उच्च स्तरीय यात्राएं विकसित करना,

· सीडीएम सहित, जलवायु परिवर्तन पर विशेषज्ञ बैठकों का आयोजन करना,

· अंश-धारकों के साथ भारत-ईयू पर्यावरण मंच का आयोजन करना जिसमें, विचारों और जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए व्यवसाय, अकादमी और नागरिक समिति को शामिल किया जाए,

· भारत और ईयू में सतत् विकास के लिए महत्वपूर्ण पर्यावरणीय समस्याओं और नीतियों की पहचान करना जहां अनुभव और सहयोग का आदान-प्रदान करना लाभदायक हो सकता हो.

भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम के 3 घटक हैं जो इस प्रकार हैं:

  1. पर्यावरण पर भारत ईयू संयुक्त कार्य समूह
  2. कार्यवाही योजना सहायता सुविधा
  3. भारत ईयू पर्यावरण मंच

पर्यावरण के संबंध में भारत – ईयू संयुक्त कार्य समूह की छ: बैठकें हो चुकी हैं. अंतिम बैठक ब्रुसेल, बेल्जियम में हुई थी. अगली (7वीं) बैठक भी शीघ्र ही प्रस्तावित है. इन बैठकों में, जलवायु परिवर्तन, रासायनिक प्रबंधन सहित खतरनाक पदार्थ प्रबंधन से संबंधित समस्याओं, वानिकी समस्याओं इत्यादि की चर्चा की जाती है.

कार्यवाही योजना सहायता सुविधा, पर्यावरण घटक (एपीएसएफ) के अंतर्गत परियोजना संचालन समिति की बैठकें भी नियमित रूप से होती हैं. इस परियोजना में निम्नलिखित पांच क्षेत्र हैं जिनमें ईयू की सहायता से हस्तक्षेप किए जा रहे हैं:

  1. अपशिष्ट क्षेत्र
  2. रासायनिक क्षेत्र
  3. जल क्षेत्र
  4. वायु क्षेत्र
  5. जलवायु परिवर्तन क्षेत्र

भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम पर यूरोपीय आयोग के दस्तावेज के प्रस्तावों में से एक प्रस्ताव भारत-ईयू पर्यावरण मंच का आयोजन करना था. इसके अनुसरण में, दोनों साझेदार विशिष्ट विषयों के साथ नियमित रूप से मंच की बैठकों का आयोजन करते आ रहे हैं. भारत-ईयू पर्यावरण मंच की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं. अंतिम बैठक १६ सितंबर, २००८ को मुंबई में हुई थी. मंच, तकनीकों की जानकारी, और सूचना का आदान-प्रदान करने और खतरनाक अपशिष्ट, रासायनिक प्रदूषण, भू-जल अभियांत्रिकी, जल उपचार और कीचड़ प्रबंधन, शासन और पर्यावरण जैसे विशिष्ट विषयों के विश्लेषण की सुविधा प्रदान करता है.

भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन

हाल ही में भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन में कार्यान्वित किए जाने वाली संयुक्त कार्यवाही योजना के माध्यम से अफ्रीकी संघ और भारत के बीच सहयोग की शुरूआत हुई है. मरूस्थलीकरण और जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को अवधारणा नोट और बजटीय प्रावधान के साथ विदेश मंत्रालय को अग्रेषित कर दिया गया है ताकि उसे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में उठाया लिया जा सके.

आईबीएसए

पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग पर आईबीएसए मंच के अंतर्गत १५ अक्टूबर २००८ को भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील के बीच एक त्रि-पक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. यह आईबीएसए देशों के बीच त्रि-पक्षीय सहयोग के लिए ढ़ांचा स्थापित करता है. आईबीएसए मंच त्रि-पक्षीय संयुक्त कार्य समूह की पिछली बैठक जुलाई, २००९ में ब्राज़ील में हुई थी. आईबीएसए मंच के अंतर्गत विचार किए जाने वाले परियोजना प्रस्तावों को पहले ही एमईए को अग्रेषित किया जा चुका है.

फिनलैंड

भारत और फिनलैंड के बीच कोई भी औपचारिक समझौता ज्ञापन मौजूद नहीं है. हालांकि भारत फिनलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग (वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत) के ढ़ांचे के तत्वाधान में नियमित जेडबल्यूजी बैठक होती रहती हैं. भारत फिनलैंड संयुक्त कार्य समूह की बैठकें भारत और फिनलैंड में वैकल्पिक रूप से प्रतिवर्ष होती हैं. अंतिम बैठक १ सितंबर, २००९ को नई दिल्ली में हुई थी. इस बैठक में वायु प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय सहयोग और अपशिष्ट प्रबंधन के व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य से संबंधित समस्याओं पर चर्चा हुई थी. सीपीसीबी और तकनीकी अनुसंधान केंद्र, फिनलैंड के बीच तकनीकी सहयोग के अंतर्गत क्षमता निर्माण की तीन परियोजनाओं पर चर्चा की गई और वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के साथ विचार-विमर्श के पश्चात् स्वीकृति दी गई |

मिस्त्र

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए मंत्रिमंडल  की स्वीकृति मांगी जा रही है.

मोरक्को

भारत और मोरक्को के बीच पर्यावरणीय सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है. नई दिल्ली में आयोजित होने वाली जेसीएम बैठक के दौरान इस पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.

स्विट्ज़रलैंड

भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए हमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से पत्र भी प्राप्त हुआ है. दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए मसौदा समझौता ज्ञापन तैयार किया जा रहा है.

जर्मनी

समझौता ज्ञापन पर 8 सितंबर 1998 को हस्ताक्षर किए गए थे (वैधता-5 वर्ष, बढ़ाने योग्य-5 वर्ष). तब से समझौता ज्ञापन समाप्त हो गया है. लेकिन पर्यावरण प्रबंधन पर सलाहकार सेवाएं (एएसईएम) तथा जीटीझेड-टीसी के रूप में, दोनों देशों के बीच सहयोग मौजूद है.

पहले भारतीय-जर्मन पर्यावरण मंच का आयोजन 18-19नवंबर 2008 को नई दिल्ली में हुआ था जिसमें जर्मनी की ओर से, निजी क्षेत्र की कंपनियों/एनजीओ शामिल थे, जिन्होंने अपने भारतीय समकक्षों के साथ जलवायु परिवर्तन और सीडीएम तथा जल-मल शोधन, सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ज़ोर देते हुए पर्यावरणीय प्रौद्योगिकियों पर बातचीत की गई. जर्मनी का नेतृत्व महामहिम सिग्मार गैब्रिएल ने किया, जो उस समय पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा के जर्मन संघीय मंत्री थे. इस कार्यक्रम में भारतीय दल का नेतृत्व तब के माननीय राज्यमंत्री, श्री एस. रघुपति ने किया था.

क्षेत्रीय सहयोग के दक्षिण एशियाई संगठन (सार्क)

सार्क ने दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी) के साथ जुलाई 2004 में; संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के साथ जून 2007 में; और संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण रणनीति (यूएनआईएसडीआर) पर सितंबर 2008 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यूएनएफसीसीसी सचिवालय के निरीक्षक के रूप में सार्क को मान्यता की प्रक्रिया भी संसाधित की जा रही है ताकि सार्क को पक्षों के सम्मेलन की बैठक में भाग लेने हेतु समर्थ बनाया जाए.

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली में 20 अक्टूबर, 2009 को आयोजित सार्क पर्यावरण मंत्रियों की 8वीं बैठक की मेज़बानी की  इससे पहले 19 अक्टूबर, 2009 को सार्क के पदाधिकारियों की बैठक हुई. इस बैठक में लिए गए निर्णय कार्यान्वित किए जा रहे हैं.