पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का राजभाषा प्रभाग वैज्ञानिक ‘जी’/सलाहकार (डॉ. सतीश चन्द्रज गढ़कोटी) के नियंत्रणाधीन कार्य करता है। राजभाषा प्रभाग में इस मंत्रालय द्वारा प्रदत्त संचालन सहायता कार्मिकों के अलावा, केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा के अधिकारी शामिल हैं। इस समय प्रभाग में संयुक्तन निदेशक (श्रीमती अवनेश शर्मा, टेलीफैक्स : 011-24361952, ई-मेल : avnesh.sharma@nic.in), दो सहायक निदेशक, चार वरिष्ठ अनुवादक तथा तीन कनिष्ठ अनुवादक हैं।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का राजभाषा प्रभाग भारत के संविधान में निहित; राजभाषा अधिनियम में परिकल्पित, संघ की राजभाषा नीति; इस संबंध में समय-समय पर जारी किए जाने वाले भारत सरकार के राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों हेतु उपयोग) नियम एवं आदेशों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु मंत्रालय के प्रशासनिक प्रमुख की सहायता के लिए है। प्रभाग के लिए, मंत्रालय के विभागों तथा उसके सभी संबद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वशासी निकायों, साथ ही प्राधिकरणों और बोर्डों में संघ के शासकीय कार्य का लेखा-जोखा हिन्दी में रखने हेतु, वार्षिक कार्यक्रम में यथा निर्धारित मदवार लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मंत्रालय के प्रशासनिक प्रमुख की सहायता करना भी आवश्यक है।

संघ की राजभाषा नीति का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु मंत्रालय के राजभाषा प्रभाग के लिए निम्नलिखित क्षेत्र सर्वोच्च महत्व के हैं :-

  • माननीय गृहमंत्री की अध्यक्षता में गठित संसदीय राजभाषा समिति की अनुशंसाओं पर राष्ट्रपति के आदेशों का अनुपालन करना, जिसमें लोकसभा के 20 माननीय संसद सदस्य तथा राज्यसभा के 10 माननीय संसद सदस्य होते हैं ;
  • माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित केंद्रीय हिन्दी समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का अनुपालन करना ;
  • मंत्रालय के माननीय मंत्री/राज्य मंत्री (प्रभारी)/राज्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित हिन्दी सलाहकार समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का अनुपालन करना ;
  • कैबिनेट सचिव/सचिव (राजभाषा) की अध्यक्षता में गठित केंद्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का अनुपालन करना ;
  • संयुक्त सचिव (राजभाषा प्रभारी) की अध्यक्षता में गठित मंत्रालय की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का अनुपालन करना।

मंत्रालय के राजभाषा प्रभाग के लिए निम्नलिखित को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करना आवश्यक है :-

  • समय-समय पर किए गए निरीक्षणों के दौरान, माननीय संसदीय राजभाषा समिति द्वारा दिए गए आश्वासनों का समयबद्ध अनुपालन ;
  • राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले दस्तावेज़ों के अनुवाद की व्यवस्था करना (उदाहरणार्थ, सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचनाएं, प्रशासनिक अथवा अन्य प्रतिवेदन एवं संसद के किसी सदन या सदनों के समक्ष रखे जाने वाले आधिकारिक प्रपत्र; निष्पादित अनुबंध और समझौते, तथा टेंडर के लाइसेंस, अनुमतियां, सूचनाएं और प्रपत्र इत्यादि); सभी विधियों, सांविधिक नियमों, विनियमों और उनके साथ जुड़े प्रपत्रों के अनुवाद से संबंधित कार्य विधि एवं कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के क्षेत्राधिकार में आते हैं और यह कार्य उस विभाग के राजभाषा विंग द्वारा किया जाता है; जबकि गैर-विधायी सामग्री का अनुवाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के अंतर्गत, केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा किया जाना आवश्यक है।
  • हिन्दी भाषा (प्रबोध, प्रवीण एवं प्राज्ञ मानक), हिन्दी टंकण, हिन्दी आशुलिपि एवं अंग्रेज़ी से हिन्दी और इसके विपरीत अनुवाद में प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।
  • मंत्रालय के विभागों/अनुभागों और उसके संबद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वशासी निकायों, प्राधिकरणों एवं बोर्डों इत्यादि से आधिकारिक कार्यों में हिन्दी के प्रगामी प्रयोग के संबंध में एकत्रित जानकारी के आधार पर, संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के संबंध में आवधिक प्रतिवेदन (उदाहरणार्थ त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक प्रतिवेदन) तैयार करना। (इन प्रतिवेदनों के साथ ही अन्य प्रासंगिक का प्रारूप राजभाषा प्रभाग के पोर्टल यानी www.rajbhasha.gov.in से प्राप्तअ किया जा सकता है)
  • मंत्रालय का राजभाषा विभाग के लिए कार्य की उपरोक्त मदों के अलावा अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार करना आवश्यक है जिससे वे अपना अधिक से अधिक शासकीय कार्य हिन्दी में सुविधाजनक तरीके से पूर्ण कर सकें, और यह लक्ष्य निम्नलिखित के माध्यदम से प्राप्त करना :-

  • हिन्दी कार्यशाला/सेमिनार/संगोष्ठी का आयोजन करना;
  • हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन करना ;
  • नेमी शासकीय कार्य को हिन्दी में सुविधाजनक रूप से पूर्ण करने के लिए मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में द्विभाषी सुविधाओं को उन्नत बनाना ;
  • मंत्रालय की “पर्यावरण’’ पत्रिका में प्रकाशन के लिए अधिकारियों को लेख आदि हिन्दी में लिखने के लिए प्रोत्साहित करना;