विकास निगरानी और मूल्यांकन (डीएमई)

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प्रस्तावना

योजना आयोग और वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग का बजट प्रभाग तथा व्यय विभाग) के निकट सहयोग से मंत्रालय की सभी योजनागत स्कीमों और कार्यक्रमों का समन्वय करने की जिम्मेदारी योजना समन्वय प्रभाग की है। इसके कार्यों में मंत्रालय की पंचवर्षीय योजनाएं बनाना, वार्षिक योजनाएं तथा वार्षिक कार्य योजनाएं बनाना उनकी मॉनीटरिंग और समीक्षा करने के साथ-साथ मंत्रालय का वार्षिक केन्द्रीय बजट तथा निष्पादन बजट बनाना भी शामिल हैं। इस प्रभाग द्वारा प्रगति रिपोर्टों तथा 20-सूत्री कार्यक्रम (बिंदु XV मद सं. 52 और 53) के अंतर्गत आने वाली रिपोर्टों की मॉनीटरिंग भी की जाती है।

वर्ष 2012-13 के दौरान किए गए कार्यकलाप

मंत्रालय द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों वाली केन्द्रीय प्रायोजित स्कीमों (सीएसएस) और केन्द्रीय क्षेत्र (सीएस) की स्कीमों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक उपाए किए जाते हैं ताकि संसाधनों का उचित और अर्थपूर्ण प्रयोग सुनिश्चित किया जा सके जिससे पर्यावरण और वानिकी एवं वन्यजीव क्षेत्रों में कार्यान्वयन एजेंसियों और राज्य सरकारों की क्षमताओं को बढ़ाया जा सके।
वर्ष 2012-13 से मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) की आठ सीएसएस को युत्तियुत्त बनाकर उनके उपुयत्त विलय द्वारा उन्हें 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) में पांच तक सीमित कर दिया है जिससे सैद्धांतिक/छत्रक स्कीमों की कुल संख्या 22 से घटाकर 18 हो गई है, जिनमें पांच सीएसएस और 13 सीएस स्कीमें हैं और एक जलवायु परिवर्तन संबंधी स्कीम है जिसे योजना आयोग द्वारा स्वीकृत किया गया है। ब्यौरा तालिका-1 में दिया गया है। उप-स्कीमों में से, निवारक कार्य नीतियों और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के माध्यम से औद्योगिक प्रदूषण उपशमन की स्कीमों का प्रदूषण उपशमन की एकल सैद्धांतिक स्कीम में विलय किया गया है। इसी प्रकार, राष्ट्रीय झील संरक्षण (एनएलसीपी) और नम भूमियों की स्कीमों का ”राष्ट्रीय संसाधनों और पारि-प्रणालियों का संरक्षण” की सैद्धांतिक स्कीम के तहत ”राष्ट्रीय जलीय पारि-प्रणाली संरक्षण स्कीम (एनपीसीए)” नामक एकल स्कीम में विलय किया गया है। इस सैद्धांतिक स्कीम के अंतर्गत ताज संरक्षण की स्कीम का भी विलय किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यकलापों की सैद्धांतिक स्कीम के अंतर्गत, मरूस्थलीयकरण प्रकोष्ठ संबंधी एक नई उप-स्कीम जोड़ी गयी है। सिविल निर्माण एकक स्कीम एक गैर- योजनागत स्कीम है और मंत्रालय के नए भवन (इंदिरा पर्यावरण भवन) की जिसके जून, 2014 तक निर्मित होने की संभावना है, के निर्माण के योजनागत व्यय में दर्शायी गयी है।
12वीं योजना में की जाने वाली नई पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं :
  • साझा बहिस्राव शोधन संयंत्र (सीईटीपी) की योजना की रिकास्टिंग
  • मल-जल शोधन क्षमता का संवर्धन
  • राष्ट्रीय जलीय प्रणाली संरक्षण योजना (एनपीसीए)
  • राष्ट्रीय पर्यावरण निगरानी कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय वानिकी सूचना प्रणाली
  • आक्रामक प्रजाति प्रबंधन
  • तटीय और समुद्रीय संरक्षण
  • पारि-प्रणाली सेवाओं और जैव विविधता का मूल्यांकन
  • पर्यावरणीय निष्पादन सूची
  • रेंजलैण्ड और सिल्वी चारागाह विकास स्कीम
  • उपग्रह आधारित वन संसाधन आकलन
  • हरित भारत मिशन
तालिका-1. बारहवीं योजना में केन्द्रीय प्रायोजित स्कीमों का युक्तिकरण

11वीं योजना में सीएसएस की संरचना

12वीं योजना में पुनर्गठित संरचना

1. राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना

·         एनआरसीडी

·         एनआरसीपी

·         एनजीआरबीए

1. राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना

·         एनआरसीडी

·         एनआरसीपी

·         एनजीआरबीए

2. प्राकृतिक संसाधनों और पारिप्रणालियों का संरक्षण

·         नम भूमि, मैंग्रोव, प्रवाल का संरक्षण

·         एनएलसीपी

·         बायोस्फेयर रिजर्व

·         बीसीआरएलआईपी

2. प्राकृतिक संसाधनों और पारिप्रणालियों का संरक्षण

·         जलीय परितंत्रों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय योजना (एनएलसीपी और नम भूमि सहित)

·         मैंग्रोव, प्रवाल का संरक्षण

·         बायोस्फेयर रिजर्व

·         बीसीआरएलआईपी

·         ताज संरक्षण सहित विरासत और पर्यटक केन्द्रों में पर्यावरणीय प्रबंधन

3. ताज संरक्षण सहित विरासत और पर्यटक केन्द्रों में पर्यावरणीय प्रबंधन
4. राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम

 

3. वनीकरण और वन प्रबंधन

·         राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम

·         हरित भारत मिशन

·         वन प्रबंधन स्कीम का तीव्रीकरण

5. वन प्रबंधन स्कीम का तीव्रीकरण
6. वन्यजीव पर्यावासों का समेकित विकास 4. वन्यजीव प्रबंधन

·         वन्यजीव पर्यावासों का समेकित विकास

·         हाथी परियोजना

7. हाथी परियोजना
8. बाघ परियोजना 5. बाघ परियोजना

11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012)

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना, 2007-12 के लिए मंत्रालय के पास 10,000 करोड़ रूपए का अनुमोदित परिव्यय था। पंचवर्षीय योजना के भीतर, पांचों वार्षिक योजनाओं में से प्रत्येक में अनुमोदित परिव्यय तथा किए गए व्यय का क्षेत्रवार ब्यौरा नीचे तालिका-29 में दिया गया है। जैसा कि स्पष्ट है, वार्षिक योजना 2007-08 में अनुमोदित परिव्यय 1351.00 करोड़ रु. था जिसकी तुलना में 1349.73 करोड़ रु. का वास्तविक व्यय हुआ था। 2008-09 में इसमें 1500.00 करोड़ रु. का परिव्यय आबंटित किया गया था जिसमें से 1483.02 करोड़ रू. का वास्तविक व्यय हुआ था । वार्षिक योजना 2009-10 में अनुमोदित परिव्यय 1880.00 करोड़ रू. था जिसे मितव्यमतस आदेशों के तहत संशोधित अनुमान स्तर पर घटाकर 1650.00 करोड़ रू. किया गया था की तुलना में वास्तविक उपयोग 1630.69 करोड़ रू. रहा। वार्षिक योजना 2010-11 का अनुमोदित परिव्यय 2200.00 करोड़ रू. था जिसमें से 2181.58 करोड़ रू.. का वास्तविक उपयोग हुआ था। 11वीं योजना के अंतिम वर्ष, वार्षिक योजना 2011-12 में अनुमोदित परिव्यय 2300.00 करोड़ रू. का था जिसमें से 1825.44 करोड़ रू. का वास्तविक व्यय हुआ था ।
तालिका-2. ग्यारहवीं योजना परिव्यय/वास्तविक व्यय का क्षेत्र-वार सार 
(करोड़ रू. में)

क्षेत्र

पर्यावरण

एनआरसीडी#

वन और वन्य जीव

एनएईबी@

पशु कल्याण

कुल

अवधि

11वीं योजना में स्वीकृत परिव्यय

1,246.01

2,540.00

2,943.99

3,150.00

120.00

10,000.00

2007-08
परिव्यय

259.16

340.00

371.61

359.23

21.00

1351.00

व्यय

224.22

320.94

361.73

422.05

20.79

1349.73

2008-09
परिव्यय

261.38

340.00

475.00

398.62

25.00

1,500.00

व्यय

240.42

326.12

520.87

370.71

24.90

1,483.02

2009-10
परिव्यय

291.42

577.33

599.63

386.62

25.00

1,880.00*

व्यय

253.03

426.69

572.00

354.97

24.00

1,630.69

2010-11
परिव्यय

480.17

751.71

592.12

352.00

24.00

2,200.00

व्यय

465.87

755.02

582.92

353.93

23.84

2,181.58

2011-12
परिव्यय

621.21

751.71

573.08

330.00

24.00

2,300.00

व्यय

465.42

421.94

579.84

334.92

23.32

1,825.44

कुल (2007-12)
परिव्यय

1,913.34

2,760.75

2,611.44

1,826.47

119.00

9,231.00

व्यय

1,648.72

2,250.71

2,617.36

1,836.58

116.58

8,470.46

क्षेत्र

पर्यावरण

एनआरसीडी#

वन और वन्य जीव

एनएईबी@

पशु कल्याण

कुल

अवधि

11वीं योजना में स्वीकृत परिव्यय

1,246.01

2,540.00

2,943.99

3,150.00

120.00

10,000.00

2007-08
परिव्यय

259.16

340.00

371.61

359.23

21.00

1351.00

व्यय

224.22

320.94

361.73

422.05

20.79

1349.73

2008-09
परिव्यय

261.38

340.00

475.00

398.62

25.00

1,500.00

व्यय

240.42

326.12

520.87

370.71

24.90

1,483.02

2009-10
परिव्यय

291.42

577.33

599.63

386.62

25.00

1,880.00*

व्यय

253.03

426.69

572.00

354.97

24.00

1,630.69

2010-11
परिव्यय

480.17

751.71

592.12

352.00

24.00

2,200.00

व्यय

465.87

755.02

582.92

353.93

23.84

2,181.58

2011-12
परिव्यय

621.21

751.71

573.08

330.00

24.00

2,300.00

व्यय

465.42

421.94

579.84

334.92

23.32

1,825.44

कुल (2007-12)
परिव्यय

1,913.34

2,760.75

2,611.44

1,826.47

119.00

9,231.00

व्यय

1,648.72

2,250.71

2,617.36

1,836.58

116.58

8,470.46

# इसमें राष्‍ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एन.आर.सी.पी.) और राष्‍ट्रीय जलीय पारि-प्रणालियों का संरक्ष्ापण परितंत्र (एन.पी.सी.ए.) की स्‍कीमें शामिल हैं।
@ इसमें राष्‍ट्रीय वनीकरण और पारि-विकास बोर्ड (एन.ए.ई.बी), राष्‍ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (एन.ए.पी.), और हरित भारत मिशन (जी.आई.एम.) की स्‍कीमें शामिल हैं।
* वित्त मंत्रालय के मितव्‍ययत अनुदेशों के तहत आर.ई. 2009-10 को घटाकर 1650.00 करोड़ रुपये किया गया।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17)

बारहवीं योजना दस्तावेज, जिसे 27 दिसम्बर, 2012 को राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) द्वारा स्वीकृत किया गया, का मूल सिद्धांत ”तीव्र, सतत और अधिक समग्र विकास है” और इसमें मुख्य लक्ष्यों, उनको पूरा करने हेतु प्रमुख चुनौतियों और उल्लिखित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु अनुसरण की जा सकने वाली व्यापक कार्य-नीति का निर्धारण किया गया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को 17,874 करोड़ रू. का परिव्यय आवंटित किया गया है जो 11वीं योजना में 9231.00 करोड़ रू. या 0.42{b9cca8aede1995d450ecbb7cabdd9c806c66ba8f7afe5985dcdbcb8cb5055004} हिस्से की तुलना में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के योजनागत आवंटन का 0.41{b9cca8aede1995d450ecbb7cabdd9c806c66ba8f7afe5985dcdbcb8cb5055004} बनता है। तथापि, वर्तमान मूल्यों की दृष्टि से इस मंत्रालय के बारहवीं योजनागत परिव्यय में ग्यारहवीं योजना परिव्यय की तुलना में 109{b9cca8aede1995d450ecbb7cabdd9c806c66ba8f7afe5985dcdbcb8cb5055004} की वृद्धि हुई है।
12वीं योजना में इस मंत्रालय हेतु 13 निगरानी योग्य समाजार्थिक लक्ष्यों की पहचान की गई है, जिनकी प्रगति की मंत्रालय द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है। ये लक्ष्य निम्नानुसार हैं:-

– पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन

  • 2017 तक भू-जल संदूषण की संभावना वो 12 अभिज्ञात संदूषित स्थलों (खतरनाक रसायन और अपशिष्ट) का आकलन एवं उपचार ।
  • 2017 तक नदियों के 80{b9cca8aede1995d450ecbb7cabdd9c806c66ba8f7afe5985dcdbcb8cb5055004} अत्यधिक प्रदूषित भागों और 2020 तक 100 प्रतिशत प्रदूषित भागों की सफाई।
  • राज्य, 2017 तक शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा करें।
  • 2020 तक 2005 के स्तरों पर 20 से 25 प्रतिशत कटौती लक्ष्य के अनुरूप सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता को कम करना।

– वन और आजीविका 

  • 1.5 मिलियन हेक्टेयर अवक्रमित भूमियों सहित जीआईएम के अंतर्गत 5 मिलियन हेक्टेयर भूमि को हरा-भरा बनाना, पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के 0.9 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का वनीकरण और पारि-बहाली।
  • 2017 तक समर्पित उपग्रह के माध्यम से आवधिक आधार पर परिवर्तन निगरानी सहित वनावरण और जैव विविधता और बढ़ते स्टॉक की प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और 2015 तक खुली वेब-आधारित राष्ट्रीय वानिकी एवं पर्यावरणीय सूचना प्रणाली की, अनुसंधान और सार्वजनिक पहुंच हेतु, स्थापना करना।
  • 2016 तक प्रत्येक संयुत्त वन प्रबंधन (जेएफएम) ग्राम हेतु ग्राम हरित गार्डों/ समुदाय फोरेस्टरों की तैनाती।
  • 2014 तक वन क्षेत्रों में सार्वजनिक पोर्टल पर सूचना से युक्त वानिकी बीज बैंक और प्रत्येक जिले में मॉडल नर्सरी स्थापित करना ।

– वन्यजीव, पारि-पर्यटन और पशु कल्याण 

  • देश के 20 प्रतिशत पशु चिकित्सकों को वन्यजीव उपचार में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • समेकित पारि-पर्यटन जिला योजनाओं में, 2017 तक सभी संभावी संरक्षित क्षेत्रों (पीए) के 10 प्रतिशत को शामिल किया जाएगा।
  • पशु कल्याण में निजी क्षेत्र, सिविल सोसाइटियों, गैर-सरकारी संगठनों और लोकोपकारियों की भागीदारी को बढ़ावा देना।

– पारितंत्र और जैव विविधता 

  • 2017 तक 0.1 मिलियन हेक्टेयर नम भूमि/ देशीय झीलों/ जल निकायों को पुनर्जीवित करना।
  • मरूस्थलों (दोनों शीत और शुष्क), तटीय क्षेत्रों, महत्वपूर्ण प्रवाल क्षेत्रों, नम भूमि, मैंग्रोव इत्यादि हेतु जैव विविधता प्रबंधन योजनाओं के मानचित्रण और तैयारी को पूरा करना।
  • इसके अतिरित्त, योजना दस्तावेज में 14 लक्ष्य भी अभिज्ञात किए गए हैं, जिन पर अन्य बातों के साथ-साथ, मंत्रालय की वार्षिक योजनाओं के माध्यम से विशेष ध्यान दिया जाएगा। ये 14 लक्ष्य निम्नानुसार हैं :-
– पर्यावरण 
  • पर्यावरण और पारिस्थितिकीय के बेहतर प्रबंधन के कारण स्वास्थ्य स्थिति में सुधार का आंकलन करने के लिए महामारी विज्ञान अध्ययन।
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकी का प्रसार और अंगीकरण, विनियमों का सुदृढ़ीकरण और सुधार, नीति निर्माण और पर्यावरणीय शासन हेतु प्रवर्तन संस्थानों में सुधार प्रारंभ करना।
  • संचयी और सामरिक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की ओर बढ़ना।
  • अवरोधों के विनियमन द्वारा सभी नदियों में पारिस्थितिकीय बहाव सुनिश्चित करना ताकि नदी बेसिनों के संरक्षण हेतु विधिक ढांचा और प्रबंधन कार्यनीति बनाकर नदीय पारि-प्रणालियों का संरक्षण किया जा सके।
  • शहरी परियोजनाओं जैसे कि स्वच्छता, लैण्डस्कैपिंग, केन्द्रीय वातानुकूलन इत्यादि में उपचरित सीवेज के पुनचक्रण और पुन: प्रयोग को बढ़ावा देना।
– वन और आजीविका 
  • वन उत्पादकता, जैव विविधता के उत्पादन एवं सतत प्रबंधन में सुधार करना (स्थानीय लोगों के साथ समान लाभ सहभागिता)।
  • वन-रैंज भूमियों/चरागाह-भूमि प्रबंधन की पुन: बहाली और तीव्रीकरण और वन फ्रिंज गांवों के आस-पास समुदाय चरागाह भूमि स्थापित करना।
  • पारि-पर्यटन सहित वन संसाधनों के प्रबंधन हेतु ग्राम वन समितियों/ संयुत्त वन प्रबंधन समितियों का क्षमता निर्माण।
  • आनुवांशिक सुधार और कलोनल ओर्चड की स्थापना सहित लघु वन उत्पाद (एमएफपी)/ गैर- इमारती वन उत्पाद (एनटीएफपी) के अंतर्गत सूचीबद्ध प्रजातियों हेतु देश के विभिन्न वन प्रकारों के लिए बीज ओर्चड और सिल्वीकल्चर का पुनरूद्धार – वन्यजीव, पारि-पर्यटन और पशु कल्याण
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम और प्रबंधित करना।
  • पोली अनसैचुरेटड फैटी अम्ल (पीयूएफए) विटामिन इत्यादि में समुद्रीय समृद्ध अनुमेय समुद्री उत्पादों का वाणिज्यकरण।
  • पारि-पर्यटन का प्रसार और स्थानीय जनसंख्या की भागीदारी पारि-विकास समर्थित आजीविका।
– पारितंत्र और जैव विविधता 
  • जैव विविधता से संबंधित राष्ट्रीय लक्ष्यों एवं संसूचकों तथा समर्थक कार्रवाइयों का विकास करना ताकि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के कार्यान्वयन का सुदृढ़ीकरण किया जा सके और स्थानीय समुदाय के आर्थिक और सामाजिक विकास हेतु जैव-सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके।
  • तटीय जैव विविधता संसाधनों का आकलन, कच्छ वनस्पतियों, प्रवाल भित्तियों और नमभूमियों और समर्थक आजीविका के सतत प्रबंधन की पुन: बहाली सुनिश्चित करना।

वार्षिक योजना 2013-14 और वार्षिक योजना 2014-15

चालू वित्तीय वर्ष (2013-14) में बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दूसरे वर्ष में मंत्रालय को 2430.00 करोड़ रू. का परिव्यय आवंटित किया गया है, जिसे संशोधित आकलन के स्तर पर घटाकर 1850.00 करोड़ रू. किया गया है। योजना के तीसरे वर्ष 2014-15 हेतु मंत्रालय का वार्षिक योजना परिव्यय 2480.00 करोड़ रू. है। दोनों वार्षिक योजनाओं का क्षेत्रवार सार नीचे तालिका-3 में दिया गया है।
तालिका-3. बारहवीं योजना परिव्यय/वास्तविक व्यय का क्षेत्रवार सार (31 जनवरी, 2014 तक) 
  (करोड़ रू. में)

क्षेत्र

पर्यावरण

एन0आर0सी0डी0#

वन और वन्य जीव

एन000बी0@

पशु कल्याण

कुल

अवधि

12वीं योजना में स्वीकृत परिव्यय

3,802.00

4,273.00

4,818.80

4,780.00

200.20

17,874.00

2012-13
परिव्यय (ब.अ.)

580.42

771.80

606.09

446.49

25.20

2430.00

वास्तविक व्यय

388.13

421.02

577.81

224.08

25.09

1636.13

2013-14
परिव्यय (ब.अ.)

614. 37

619.80

719.14

451.49

25.20

2430

परिव्यय (सं.अ.)

431.10

530.26

580.31

300.93

7.40

1850

31.01.2014 तक व्यय

349.59

505.79

553.35

285.62

5.73

1700.08

2014-15
परिव्यय (ब.अ.)

678.01

632.79

713.11

432.89

23.20

2480.00

# राष्‍ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एन.ए.ई.बी.) और राष्‍ट्रीय जलीय पारि-प्रणालियों का संरक्ष्ाएण परितंत्र (एन.पी.सी.ए.)
@ राष्‍ट्रीय वनीकरण और पारिविकास बोर्ड (एन.ए.ई.बी.), राष्‍ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (एन.ए.पी.), और हरित भारत मिशन (जी.आई.एम.)

वर्ष 2013-14 के दौरान जारी अन्य महत्वपूर्ण कार्यकलाप

मंत्रालय के नियंत्रणाधीन सभी मांगों/विनियोजनों के संबंध में वार्षिक योजना 2014-15 तैयार की गई। इसमें 2013-14 हेतु वार्षिक निष्कर्ष बजट में निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में हुई वास्तविक और वित्तीय प्रगति की नियमित निगरानी शामिल है।
राज्य योजनाओं से संबंधित मामलों पर भी विचार किया गया। विशेष घटक योजनाओं से संबंधित मुद्दों, विशेषकर अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी), जनजाति उप-योजना (टीएसपी) और पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) योजना, पर भी योजना आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ परामर्श किया गया। पर्यावरणीय आयोजना संबंधी और योजना आयोग द्वारा इस मंत्रालय को भेजे गए सभी अन्य संदर्भों का निपटान इस मंत्रालय के योजना समन्वय प्रभाग द्वारा किया गया।
इस प्रभाग ने संशोधित 20 सूत्री कार्यक्रम, 2006 की मद संख्या 15 (पर्यावरण संरक्षण एवं वन वृद्धि) संबंधी अर्ध-वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ-साथ परियोजनाओं के अधिक समय और लागत संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा इसे संदर्भित मामलों को भी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया। दिनांक 31 अक्टूबर, 2013 को योजना आयोग में, वार्षिक योजना 2013-14 के संबंध मे एक अर्ध-वार्षिक कार्य निष्पादन बैठक का आयोजन किया गया जहां सभी आयोजना स्कीमों के भौतिक एवं वित्तीय निष्पादनों की समीक्षा की गई।