मरूस्थलीकरण प्रकोष्ठ

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परिचय

यूएनसीसीडी सचिवालय को प्रस्तुत चौथी राष्ट्रीय रिपोर्ट, 2010 की व्याख्या

इस रिपोर्ट में न केवल भारत सरकार की कई पहलों, बल्कि मरूस्थलीकरण, भू—अवक्रमण और सूखे के मुद्दों के निराकरण में सिविल समाज के योगदान को भी शामिल किया गया है। पढ़ें रिपोर्ट

भारत की चौथी राष्ट्रीय रिपोर्ट

कार्यान्वयन पद्धति की निष्पादन समीक्षा और आकलन
युएनसीसीडी के एक हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, भारत विभिन्न कार्यक्रमों को कार्यान्वित करके और यूएनसीसीडी को प्रत्येक चार साल पर प्रगति रिपोर्ट देकर अपने दायित्यों का निर्वहन करता रहा है। पढ़ें रिपोर्ट

एसएलईएम परियोजना 

एसएलईएम कार्यक्रम वैश्विक पर्यावरणीय सुविधा (जीईएफ) के भागीदारी कार्यक्रम (सीपीपी) के तहत भारत सरकार और वैश्विक पर्यावरण सुविधा(जीईएफ)की एक संयुक्त पहल है। एसएलईएम परियोजना का उद्देश्य स्थायी भूमि प्रबंधन को बढ़ावा देना और जैव विविधता का प्रयोग करना तथा पारिस्थितिकीय प्रणालियों की क्षमता को बनाए रखना है ताकि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सामान और सेवाओं की सुपुर्दगी की जा सके। अधिक पढ़ें।

सतत भूमि और परि—प्रणाली प्रबंधन (एसएलईएम ) कार्यक्रम 

सतत भूमि और परि—प्रणाली प्रबंधन (एसएलईएम) वैश्विक पर्यावरणीय सुविधा के भागीदारी कार्यक्रम (सीपीपी) के तहत भारत सरकार और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) की एक संयुक्त पहल है।

एसएलईएम परियोजना का उद्देश्य सतत भूमि प्रबंधन को बढ़ावा देना और जैव विविधता का प्रयोग करना तथा पारिस्थितिकीय प्रणालियों की क्षमता को बनाए रखना है ताकि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सामान और सेवाओं की सुपुर्दगी की जा सके।

जीईएफ कार्यक्रम संबंधी दृष्टिकोण को दीर्घकालिक और वैश्विक पर्यावरण पर बड़े पैमाने पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाने के उद्देश्य वाली अभी तक परस्पर संम्बद्ध अलग—अलग परियोजनाओं की रणनीतिक व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सतत विकास कार्यढांचे के अंतर्गत जीईएफ के संपूर्ण केंद्रीय क्षेत्रों में प्राप्तकर्ता देशों, जीईएफ और अन्य जीईएफ पणधारियों से सहयोग करके उत्प्रेरक कार्रवाई और दोहरी सफलता एवं नवाचारों द्वारा, वैश्विक पर्यावरण लाभों को अधिकतम करके और उनका मापन करके तथा दानदाताओं और दूसरे भागीदारों को कार्यक्रम के दायरे के आधार पर अतिरिक्त और केंद्रीत वित्तपोषण के निवश के लिए समर्थकारी बनाकर इन प्रभावों का पता लगाना है।

एसएलईएम – एक संक्षिप्त परिचय

भारत सरकार ने 11 वीं योजना दस्तावेज में कृषि उत्पादन बढ़ाने को उच्च प्राथमिकता दी है ताकि 4.1 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि हासिल की जा सके। योजना के मुताबिक यह माना जा रहा है कि दश में प्राकृतिक संसाधनों में कमी और अवक्रमण के चलते इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है, इसलिए इस योजना में प्राकृतिक संसाधन आधार के संरक्षण, दोहन एवं विकास की प्रतिबद्धता की गई है।

योजना में यह भी माना गया है कि इसे प्रभावशाली बनाने हेतु स्थायी भूमि और परि—प्रणाली प्रबंधन का घरेलू और सामुदायिक स्तर पर गरीबी कम करने में प्रत्यक्ष योगदान होना चाहिए , जो भूमि की गुणवत्ता और परि—प्रणाली की अखंडता को बनाए रखने के अतिरिक्त होना चाहिए।

11 वीं योजना के कार्यान्वयन में योगदान के लिए सतत भूमि और परि—प्रणाली प्रबंधन — देश का भागीदारी कार्यक्रम (एसएलईएम सीपीपी) संचालित किया गया था।

एसएलर्इएम भागीदारी का समग्र उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग की दक्षता में वृद्धि, भूमि सुधार और परि—प्रणाली उत्पादकता की बेहतरी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों सहित अतिरेक मौसम दशाओं की सुभेद्यता में कमी को बढ़ावा देकर भारत में गरीबी उन्मूलन में योगदान करना है। भागीदारी, विशेष रूप से निम्नलिखित में सहायक होगी —

  • बायोमास का इस ढंग से उत्पादन,पैदावार और प्रयोग करने हेतु, कि इसकी उत्पादकता अधिकतम हो, अवक्रमित भूमि(कृषि भूमि एवं वन) और बायोमास आवरण की बहाली के साथ—साथ कार्बन प्रथक्करण, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रयोग के द्वारा भू—अवक्रमण का निवारण और/या नियंत्रण।
  • भूमि और परि—प्रणाली प्रबंधन के सुदृढ़ीकरण हेतु स्थानीय क्षमता एवं संस्था निर्माण में वृद्धि।
  • देश में और देश के बाहर एस एल ई एम में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अच्छी परंपराओं के ज्ञान के प्रसार एवं अनुप्रयोग को सुकर बनाना, और
  • संयुक्त राष्ट्र जैविक विविधता सम्मेलनों (सीबीडी), जलवायु—परिवर्तन (यूएनएफसीसीसी)और मरूस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलनों में अधिकतम समन्वय के लिए सफल भूमि एवं पारि —प्रणाली प्रबंधन परम्पराओं एवं प्रौद्योगिकियों का द्विगुणीकरण एवं मापन।