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परिचय

हमारे बारे में – राष्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकी विकास बोर्ड

अगस्त 1992 में स्थापित, राष्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकी विकास बोर्ड (एनएईबी), देश में वनीकरण, वृक्षारोपण, पारिस्थितिक पुनरोद्धार और पारिस्थितिक-विकास गतिविधियों के लिए उत्तरदायी है, जिसमें क्षरित वन क्षेत्रों और वन क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और अन्य संरक्षित क्षेत्रों के साथ ही पारिस्थितिक रूप से कमज़ोर क्षेत्रों जैसे पश्चिमी हिमालय, अरावली, पश्चिमी घाट, इत्यादि के आसपास की भूमि पर विशेष ध्यान दिया जाता है. एनएईबी की विस्तृत भूमिका और कार्य नीचे दिए गए हैं.

  • लागत प्रभावी तरीके से, क्रमिक योजना एवं क्रियान्वयन के माध्यम से क्षरित वनों और आसपास की भूमि के पारिस्थितिक पुनरुद्दार के लिए तंत्र विकसित करना;
  • देश में पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए वन क्षेत्र में प्राकृतिक पुनर्जनन के माध्यम से बहाली और ग्रामीण समुदायों के लिए जलाऊ लकड़ी, चारे और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना;
  • जलाऊ लकड़ी, चारे, इमारती लकड़ी और अन्य वन उत्पादन की मांग को पूरा करने के लिए क्षरित वन और उसके आसपास की भूमि पर इनकी बहाली;
  • क्षरित वन क्षेत्रों एवं इनके आसपास की भूमि के पुनरोद्धार के लिए नई और उचित तकनीकों का प्रसार करने हेतु अनुसंधान और अनुसंधान निष्कर्षों का प्रायोजन करना;
  • सामान्य जागरूकता निर्मित करना और वनीकरण एवं पारिस्थितिकी-विकास का प्रचार करने में सहायता के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और अन्य की सहायता से लोगों के आंदोलन को बढ़ावा देना और क्षरित वन क्षेत्रों और उनके आसपास की भूमि के प्रतिस्पर्धी और सतत् प्रबंधन का प्रचार करना;
  • वनीकरण, वृक्षारोपण, पारिस्थितिक पुनरुद्दार तथा पारिस्थितिक विकास की कार्यवाही योजनाओं का समन्वयन और निगरानी करना; और
  • देश में वनीकरण, वृक्षारोपण, पारिस्थितिक पुनरोद्धार एवं पारिस्थितिक विकास गतिविधियों के लिए सभी अन्य आवश्यक कदम उठाना|