• NAME:-

    Shiv Kumar Singh
  • EMAIL:-

    shibbu.chahar@gmail.com
  • MOBILE:-

    9911634155
  • ADDRESS:-

    Q no. 584 type III Krishi Kunj Pusa New Delhi

Subject:-

Save environment

Story:-

  सुनामी का रूप लिए, सागर ने कहर मचाया है। प्रचंड रूप सूर्य ने बना, इस धरा को खूब जलाया है।। पर्वत, झरने, नदियाँ निगली, पशु और पक्षी में पीड़ा है। इस सुंदर प्रकृति में, लगा मानव रूपी कीड़ा है।। अन्धविकास के चक्कर में, मौत जगत में बांट रहा। जिस डाली पर बैठा है, उसको ही मानव काट रहा।। सभ्यता बढी फूली और फली, नदियों ने उन्हें सवारा है। मानव तो नित नित बढ़ता गया, नदियों को उसने मारा है।। मल, मूत्र, रसायन बहा दिए, पीने को पानी नहीं बचा। धूल और धुआं फैलाकर, अपनी ही मौत का खेल रचा।। हर जगह जहर जो फैलाया, तो जहर ही केवल खाओगे। बोए पेड़ बबूल के, तो आम कहां से पाओगे।। ओजोन परत अब छीण हुई, रोगों ने जीवन निगले हैं। सागर का स्तर रोज बड़ा, बर्फीले शिखर जो पिघले हैं।। ताल और कुएं सूख गए, अब तो बोतल में नीर भरा। आत्महत्या किसान करें, और भूखा उसका बैल मारा।। तापमान जो बढ़ता गया, सब जलकर भस्म हो जाएगा। आग का गोला थी धरती, फिर मंजर वह बन जाएगा।। जंगल के राजा शेर लुप्त, कस्तूरी हिरण भी नहीं रहे। बढ़ और कदम की छांव कहां, अब ढाक के पत्ते नहीं रहे।। बुलबुल, सारस न गिद्ध रहे, लुप्त हो रहे पक्षी हैं। इस नष्ट हो रही सृष्टि का, केवल मानव ही भक्षी है।। छेड़ा जो प्रकृति को, तो फैली यहां महामारी है। समय अधिक अब दूर नहीं, अगली मानव की बारी है।। पेड़, पौधे, पशु और पक्षी, सबकी यहां जरूरत है। झरने, पर्वत और नदियों से, बनी प्रकृति की मूरत है।। सीमित साधन है दुनिया में, आगे बढ़ इन्हें बचा ले तू।बुद्धिमान और बलशाली, मानव अस्तित्व बचा ले तू।। खतरा सर पर मंडराया है, आनी विपदा भारी है। मानो चाहे ना मानो, यह प्रलय की तैयारी है।।  

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