• NAME:-

    Monica Rathi
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    choudharymoni@gmail.com
  • MOBILE:-

    09873645453
  • ADDRESS:-

    Flat no. 307,Tower No.9, Panchsheel primrose, Hapur road,opposite anaj mandi,Ghaziabad,U.P.

Subject:-

Mere Ghar Ek Chidiya Aayi

Story:-

           मेरे घर एक चिड़िया आई
बहुत खुशनसीब है कि हम ऐसे ग्रह पर रहते हैं जहां जल का भंडार है तथा हरियाली का अंबार है….. बचपन से ही मुझे प्राकृतिक दृश्य बहुत आकर्षित करते थे…. ऊंचे-ऊंचे पहाड़, झर-झर करते झरने, कल-कल करती नदियां,और चहचहाते पक्षी…. सब देखना इनके बीच रहना मुझे बहुत अच्छा लगता था और मैं बहुत धन्य हूँ भगवान का कि मेरा बचपन ऐसे प्राकृतिक दृश्यों के बीच गुजरा.... जहां हमने खूब चिड़ियों की चहचहाहट सुनी, पक्षियों को अपने आसपास देखा….थोड़ा सा दाना डालते ही ढेर सारी चिड़िया आ जाना... आज मैं जब उस उन बातों को याद करती हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन यदि मैं आज के समय की बात करूं…. आज मैं खुद एक मां हूं और जब मैं यह देखती हूं कि जो बचपन मैंने जिया है वह मेरे बच्चे नहीं जी पा रहे हैं तो मुझे सोच कर बहुत दुख होता है……शहरों के इन कँक्रीट भरे जंगलों के बीच रहकर हम प्राकृतिक नजारे तो क्या दूर तक अपनी दृष्टि भी नहीं डाल सकते…... हालांकि मैं और मेरा परिवार समय-समय पर प्रकृति की शांति को महसूस करने पहाड़ी स्थलों पर जाते हैं किंतु साल के वह 5 या 10 दिन पूरे साल की पूर्ति नहीं कर पाते…. स्वयं को प्रकृति के बहुत पास रहने के लिए मैंने अपने घर में ही प्रकृति को अपने पास रखना शुरु कर दिया…. प्रकृति की सबसे अनमोल देन है पेड़ पौधे…. पेड़- पौधों का हमारे जीवन में क्या महत्व है हम सब समझते हैं किंतु बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इतना जानने के बाद भी लोग इन पेड़ पौधों से दोस्ती नहीं कर पाते हैं......पेड़-पौधों को नहीं समझते हैं….मैं यहां तेरह मंजिली इमारत में रह रही हूं…. मुश्किल से दो या चार घरों में कुछ पौधे देखती हूं…….वही मेरा पेड़ पौधों से इतना लगाव है कि मेरे पूरे घर में आपको पौधे ही पौधे देखने को मिलेंगे चाहे घर के अंदर या घर के बाहर…..यह पेड़ पौधे मुझे बहुत खुशी प्रदान करते हैं, सुबह सुबह उठकर मेरा सबसे पहला कार्य होता है पेड़- पौधों से बातें करना, उनका ख्याल रखना, सुबह-सुबह हरियाली देख कर मुझे बहुत अच्छा लगता है और औरों को भी मै प्रेरित करती हूं कि वह भी अपने घरों में अधिक से अधिक पौधे लगाएं…. शुरू में मैंने बात की थी चिड़िया की…. नन्ही- नन्ही चिड़िया मुझे बहुत अच्छी लगती हैं…. यहां बहुमंजिला इमारतों में बहुत ही कम छोटी चिड़िया देखने को मिलती हैं केवल यहां पर साम्राज्य है तो वह है सिर्फ कबूतरों का….जहां देखो वहां ये कबूतर ही कबूतर दिखाई पड़ते हैं…. किंतु मेरा उद्देश्य पेड़-पौधों को लगाने का यह भी था कि मैं इन छोटी-छोटी चिड़िया को अपनी बगीचे में आकर्षित कर सकूं…. इन्हीं छोटी-छोटी चिड़िया को आकर्षित करने के लिए मैंने रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे लगाए और आप विश्वास नहीं मानेंगे कि इन पौधों से आकर्षित होकर न जाने कितनी तितलियां, मधुमक्खियां मेरे घर आती रहती हैं… लेकिन मुझे तो सिर्फ इंतजार था, नन्ही चिड़िया का, उसके प्यारे घोंसले को देखने का…..आखिरकार वह दिन आ ही गया जब 4 साल के प्रयास के बाद नन्ही सनबर्ड नाम की चिड़िया ने मेरे घर एक प्यारा सा घोंसला बनाया….. उस चिड़िया के घोंसला बनाने की प्रक्रिया को देखकर मुझे बहुत अचंभा हुआ... जिस प्रकार मनुष्य पैसा-पैसा जोड़कर अपना घर बनाता है उसी प्रकार यह नन्हे जीव भी तिनका-तिनका जोड़ कर अपनी गृहस्थी जमाते हैं…. दिन रात मेहनत करके नन्हे चिड़ा और चिड़िया ने आखिरकार घोंसला बनाया और मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा कि उस घोसले में एक नहीं दो नहीं पूरे पाँच अंडे हैं…... दिन प्रतिदिन मैंने उनकी गतिविधियों को देखा…..एक लगाव सा हो गया था मुझे उनसे….घर आकर सबसे पहले मैं उनके ही पास जाती थी,यह देखने के लिए वे क्या कर रहे हैं…. छोटे-छोटे चूजे मेरे पास जाते ही अपनी चोंच खोल कर खाना मांगते थे फिर मैं उन्हें समझाती कि नहीं तुम्हारी मां तुम्हें खाना खिलाएगी मैं तुम्हें तुम्हारा खाना नहीं खिला सकती हूं ….. उनसे बातें करना मुझे बहुत अच्छा लगता था….धीरे-धीरे वह बड़े हुए और एक दिन आया जब सब उड़ गए…. बस रह गई है तो सिर्फ उनकी यादें और मेरे पारिजात वृक्ष मे आज तक टंगा हुआ वह घोंसला जिसे देख कर मैं उनकी प्यारी सी यादों में खो जाती हूं…..
तो यह थी मेरी कामयाबी की कहानी…और मैं इसे अपनी बहुत बड़ी कामयाबी मानती हूं….दिल्ली एनसीआर के इन कंक्रीट भरे जंगलों की ऊंची-ऊंची इमारतों के बीच खुद को प्रकृति से जोड़ पाना, प्रकृति को खुद अपने घर में बुलाना यह बहुत बड़ी बात है….मैंने यह सफलता पाई है बहुत सालों के बाद और मैं इस प्रयास में हमेशा लगी रहूंगी कि मैं कैसे भी अपनी वन संपदा, अपने जीव-जंतुओं को संरक्षित करने में अपना योगदान दे सकूं……
मुझे आशा है कि आपको मेरी सफलता की यह कहानी पसंद आएगी ।
बहुत-बहुत धन्यवाद
मोनिका राठी

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